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आगरा में जन्माष्टमी पर सरकारी गड्ढे ने मां से छीना कान्हा

पर्यटन नगरी की वीआईपी रोड (फतेहाबाद मार्ग) पर खुले मेनहोल ने जन्माष्टमी की शाम आठ साल के मासूम की जान ले ली। नन्हा बालक अपनी मां के साथ अंगुली पकड़कर पीएसी कैंपस में लगी जन्माष्टमी देखने जा रहा था। मां की आंखों के सामने वह कई फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा। मां चीखती रह गई। जब तक राहत कार्य शुरू हुआ देर हो चुकी थी। बालक को बचाया नहीं जा सका। 
घटना मंगलवार की रात करीब नौ बजे की है। तुलसी चबूतरा, गोबरा चौकी निवासी शिवम पुत्र पुरुषोत्तम राठौर अपनी मां नीलम और बहनों के साथ जन्माष्टमी देखने निकला था। मोहल्ले की कई और महिलाएं साथ थीं। सभी पैदल-पैदल सड़क किनारे चल रहे थे। होटल हॉवर्ड पार्क प्लाजा के निकट डीलक्स इन के सामने नाले का मेनहोल खुला पड़ा था। शिवम ने अपनी मां की अंगुली पकड़ रखी थी। लाइट नहीं थी। सड़क पर अंधेरा था। अचानक नीलम की चीख सुनकर महिलाओं के कदम थम गए। शिवम खुले मेनहोल में जा गिरा। लगभग बीस फीट गहरे इस गड्ढे में पानी भरा था। महिलाओं ने मदद के लिए चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। 

बच्चे को बचाने के लिए महिलाओं ने उतारी साड़ी
दो युवक मदद के लिए आए। महिलाओं ने उन्हें अपनी साड़ी उतारकर दी। कहा कि इसके सहारे वे गड्ढे में उतर जाएं। सूचना पर गोबर चौकी से भीड़ आ गई। दो युवक गड्ढे में उतरे। करीब पंद्रह मिनट के अथक प्रयास के बाद बालक को बाहर निकाला। तब तक देर हो चुकी थी। उसकी सांसें रुक गई थीं। धड़कन बंद हो चुकी थी। बालक को पास ही एक नर्सिंग होम में ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बेटे की लाश देखकर मां का कलेजा फट गया। बवाल के डर से थाने से फोर्स आ गया। बस्ती वाले होटल डीलक्स इन के मैनेजर को हादसे के लिए जिम्मेदार बताने लगे। पुलिस से कहा कि एक दिन पहले सफाई के लिए मेनहोल के ऊपर से पत्थर हटाया गया था। होटल वाले ने सफाई कर्मचारी बुलवाए थे। तभी से यह खुला हुआ था। इस बंद नहीं कराया गया।
पुलिस ने बताया कि होटल डीलक्स इन के महेंद्र के खिलाफ तहरीर दी गई है। मुकदमा दर्ज कर जांच की जाएगी। जांच में साफ होगा कि किसकी लापरवाही से हादसा हुआ।

तीन बहनों का इकलौता भाई था शिवम
आगरा। हंसमुख, चंचल और चुलबुले शिवम की याद परिजनों के आंसू थमने नहीं दे रही है। मंगलवार की सुबह वह हाथ में झंडा लेकर स्कूल गया था। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उसने भी भाग लिया था। स्कूल से लौटने के बाद वह घरवालों का कृष्ण बन गया था। शाम से ही जिद कर रहा था मां हिंडोला देखने चलना है।
शिवम के पिता का टेंट का व्यापार है। गोबर चौकी इलाके में हादसे से मातम का माहौल है। शिवम तीन बहनों का इकलौता भाई था। बड़ी बहन नीरू है। वैष्णवी और मोहिनी उससे छोटी हैं। घर में मची चीखपुकार से तीनों बहनों भी दुखी हैं। भाई कहां गया यह घरवालों से पूछ रही हैं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि हादसे ने हर किसी को हिला दिया है। रातभर मोहल्ले की महिलाएं शिवम के घर के बाहर फर्श पर बैठी रहीं। किसी के घर जन्माष्टमी की पूजा भी नहीं हुई। जिनके व्रत थे उन्होंने व्रत नहीं तोड़े। महिलाएं आपस में बातें कर रही हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। मां की आंखों के सामने बेटी की जान चली गई। वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पाई।
शिवम के बाबा और दादी की हालत किसी से देखी नहीं जा रही है। बाबा ओमप्रकाश और दादी मुन्नी देवी गुमसुम हो गए हैं। रिश्तेदार परिवार को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। हालात से समझौता करने की हिम्मत दे रहे हैं। मां एक की बात बोल रही है कि वह मर जाती। बेटे को कुछ नहीं होता। आठ साल उसने सीने से लगाकर उसे पाला-पोसा था। उसके बिना कैसे जीएगी। अब कौन उसे मां कहकर बुलाएगा। वह खाना लेकर किसके पीछे भागेगी। शैतानी करने पर किसे डांटेगी। उसका कान्हा कहां चला गया। उसने किसी का क्या बिगाड़ा था।

ताजनगरी में यह पहला हादसा नहीं
ताजनगरी में खुले मैनहोल और गड्ढे ने पहली बार किसी की जान नहीं ली है। यहां इस तरह के हादसे होते रहते हैं। पुलिस आक्रोश को देखते हुए मुकदमा भी लिखती है मगर उस मुकदमे में कभी कार्रवाई नहीं होती है।
26 जनवरी 2012 को पंजाब होशियारपुर की लेडी डॉक्टर की मौत हुई थी। पुरानी मंडी-विक्टोरिया पार्क मार्ग पर 42 वर्षीय डॉक्टर अंजना करारा खुले मेनहोल में गिरी थीं। इस मामले में मुकदमा हुआ था मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-दिसंबर 2014 में अमरपुरा के पास बाइक सवार दो लोग सड़क पर गड्ढे में गिरे थे। दोनों की मौत हो गई थी। इस हादसे के तीन दिन बाद इसी गड्ढे में एक और युवक की जान गई थी। मुकदमा दर्ज हुआ था मगर कार्रवाई नहीं हुई।
-वर्ष 2016 न्यू आगरा थाने के सामने आवास विकास कालोनी का एक युवक सीवर लाइन में गिर पड़ा था। अचानक सड़क घंस गई थी। उसकी मौत हो गई थी। मुकदमा लिखा गया मगर किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

आखिर जिम्मेदार कौन
नाले का मैनहोल खुला हुआ था। उसके पर कोई ढक्कन नहीं था। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। लाइन किसकी है। उसके रख रखाव की जिम्मेदार किसकी है। कोई हादसा होगा तो जिम्मेदार कौन होना चाहिए। पुलिस अच्छे से जानती है मगर सरकारी लोग फंस रहे होते हैं इसलिए कभी कार्रवाई नहीं करती। भले ही किसी की जान चली जाए।

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