
मन को वश में करो, कोई लक्ष्य असंभव नहीं
Agra News - डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में श्रीमद्भगवद्गीता व्याख्यान माला का आयोजन हुआ। इस्कॉन आगरा के अरविंद स्वरूप प्रभु ने मन को संतुलित करने के उपाय बताए। छात्रों ने अपनी अच्छी और बुरी आदतों पर चर्चा की। निदेशक प्रो. संतोष बिहारी शर्मा ने युवा प्रतिभाओं के लिए मन की चंचलता को चुनौती बताया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दाऊ दयाल व्यावसायिक शिक्षण संस्थान में श्रीमद्भगवद्गीता व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। शुक्रवार को खंदारी परिसर स्थित संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को श्रीमद्भागवत कथा का ज्ञान दिया गया। मुख्य वक्ता इस्कॉन आगरा के अरविंद स्वरूप प्रभु ने भगवद्गीता के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का व्यावहारिक मार्ग बताया। प्रभु जी ने कहा कि मन को संतुलित करने का सबसे सरल तरीका है – आहार, निद्रा और रीडिंग हैबिट का संतुलन। जब भोजन सात्विक हो, नींद नियमित एवं पर्याप्त हो तथा प्रेरक साहित्य का नियमित पठन हो, तब मन स्वयं स्थिर होने लगता है और व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर एकाग्रचित्त होकर अग्रसर होता है।
इंटरैक्टिव सत्र में छात्र-छात्राओं से उनकी पांच अच्छी व पांच बुरी आदतों पर चर्चा हुई। देर रात मोबाइल चलाना, अनियमित दिनचर्या, नकारात्मक सोच जैसी आदतों को छोड़ने तथा सुबह जल्दी उठना, ध्यान-जप, सात्विक भोजन और नियमित व्यायाम अपनाने के व्यावहारिक उपाय बताए गए। संस्थान के निदेशक प्रो. संतोष बिहारी शर्मा ने कहा कि आज का युवा अत्यंत प्रतिभाशाली है, लेकिन मन की चंचलता ही सबसे बड़ी बाधा है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही संदेश दिया था कि मन को वश में करो, फिर कोई लक्ष्य असंभव नहीं। प्रो. बीडी शुक्ला ने बताया कि व्याख्यान माला से युवाओं को गीता के अमर संदेशों से जोड़ा जा रहा है। इस मौके पर डॉ. केके पचौरी, डॉ. निशांत चौहान, निधि यादव, सुनील कुमार, आशीष मिश्रा, प्रवीण कुमार मौजूद रहे।

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