
नीम तेल से मटर की फसल में करें कीट व रोग नियंत्रण
Agra News - मोहनपुरा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कासगंज के गांव कातौर के किसानों को नीम के तेल से मटर की फसल में कीट और रोगों के नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने नीम तेल के प्रभाव और जैविक तरीकों से फसलों की सुरक्षा पर जोर दिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ावा मिल सके।
मोहनपुरा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक व अधिकारियों ने कासगंज के गांव कातौर के किसानों को नीम के तेल से मटर की फसल में कीट व रोगों के नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया है। मटर की फसल में लगने वाले कीट व रोगों की वैज्ञानिकों ने किसानों को विस्तार से जानकारी दी। शुक्रवार को कांतौर गांव में आयोजित एक दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में नीम तेल का सही तरीके से प्रयोग करना भी सिखाया। वैज्ञानिक डा. रितेश कुमार ने किसानों को मटर की फसल में बढ़ते हुए कीट जैसे इल्ली, पत्ती लपेटक, एफिड, थ्रिप्स और फली छेदक पर नीम तेल के प्रभाव के बारे में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की।
नीम तेल न केवल कीटों के विकास को रोकता है। पौधों पर प्राकृतिक सुरक्षा कवच बनाकर भविष्य के प्रकोप को भी कम करता है। डा. रितेश ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए बायोपेस्टीसाइड्स जैसे नीम तेल, बवेरिया, वर्टिसिलियम और ट्राइकोडर्मा का उपयोग आवश्यक होता जा रहा है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डा. अंकित सिंह भदौरिया ने किसानों को बताया कि जैविक तरीकों से फसलों का संरक्षण न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखता है। फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होता है। उन्होंने जैव कीटनाशकों के उद्यानिकी में उपयोग और उनके दीर्घकालिक लाभों के बारे में किसानों को बताया।

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