extinct Budhi Ganga river is being rejuvenate in Kasganj - तीन दशकों से विलुप्त बूढ़ी गंगा को पुनःजीवित करने उतरा कासगंज DA Image

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तीन दशकों से विलुप्त बूढ़ी गंगा को पुनःजीवित करने उतरा कासगंज

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तीन दशकों से विलुप्त कासगंज की बूढ़ी गंगा को पुनः जीवित करने के लिए बुधवार को जनपद का जनसमुदाय श्रमदान करने उतर पड़ा। गांवों और शहरी क्षेत्र से बढ़ी तादाद में लोगों का जुटान हुआ और लोगों ने फावड़े लेकर खुदाई-सफाई शुरू कर दी।
विशाल श्रमदान और बूढ़ी गंगा पुनरोद्धार कार्य का शुभारंभ शिलापट्ट का अनावरण कर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने किया। इस मौके पर जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह ने सभी को पूरी कार्य योजना की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि, 60 गांवों से होकर गुजरती बूढ़ी गंगा 118 किलोमीटर दूरी जनपद में तय करती है, जिसे सफाई खुदाई और उसमें पानी लाने के लिए अभियान चल रहा है, इससे गांवों के तमाम किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, किसानों की उन्नति होगी, भूजल स्तर बेहतर बना रहेगा। अभी आज श्रमदान से काम शुरू हुआ है बाद में इस पूरे काम को 18 हजार मनरेगा योजना के श्रमिक अंजाम तक पहुंचाएंगे। इस दौरान गांवों के महिला, पुरुषों, छात्रों, युवक युवतियों ने श्रमदान में भाग ले रहे हैं।
विलुप्त हो चुकी प्राचीन बूढ़ी गंगा को पुनर्जीवित करने के लिए बुधवार को कासगंज का जन समुदाय श्रमदान करने उतर पड़ा। हवन यज्ञ करने के बाद फावड़े और तसले लेकर 25 हजार लोगों ने इसकी शुरुआत की। इनका उत्साह बढ़ाने प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह पहुंचे। उन्होंने श्रमदान की जानकारी मुख्यमंत्री को देने के साथ ही सरकार की ओर से मुहिम को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
बूढ़ी गंगा किनारे बसे 60 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने सुबह छह बजे से ही हाथों में फावड़े और तसले संभाल लिये। पहले सभी ने अपने अपने सेक्टरों में श्रमदान शुरू करने से पहले हवन यज्ञ कर आहुतियां डाली। चारों ब्लॉकों का मुख्य श्रमदान और समारोह मानपुर नगरिया के निकट बूढ़ी गंगा पर किया गया। यहां पहुंचे बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने विधायक देवेंद्र राजपूत, डीएम चन्द्रप्रकाश सिंह, एसपी अशोक कुमार शुक्ला, सीडीओ डा. दिनेश कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष पूर्णेन्द्र सोलंकी आदि ने हवन यज्ञ कर श्रमदान किया।
इस मौके पर मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि जल और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। बूढ़ी गंगा के लिए जो श्रमदान शुरू किया गया है, यह ऐतिहासिक है। वे मां बूढ़ी गंगा के लिए पूरा सहयोग करेंगे, प्रदेश सरकार नदियों के लिए काम कर रही है। उन्होंने बढ़ते प्रदूषण पर भी चर्चा की। विधायक देवेंद्र राजपूत ने कहा कि, यह पुनीत कार्य है, बूढ़ी गंगा में पानी आने से बहुत लाभ होंगे। डीएम चन्द्रप्रकाश सिंह ने कहा कि जन सहयोग से ही प्रशासन ने यह बीड़ा उठाया है, इसमें सरकार और जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों समाजिक संगठनों का सहयोग मिल रहा है, इसी सहयोग से 115 किलोमीटर लम्बी बूढ़ी गंगा को पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है। एसपी अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि, हम बूढ़ी गंगा को पुनर्जीवित नहीं कर रहे बल्कि संस्कृति को बचाने की बड़ी शुरुआत करने जा रहे हैं।

बूढ़ी गंगा एक नजर में
बूढ़ी गंगा के नाम से उप गंगा कभी बहती थी, जो विलुप्त हो चुकी है। इसका हेड यहां कासगंज-अलीगढ़ सीमा पर गांव ढेला सराह और सांकरा क्षेत्र के बीच से शुरू होता है। यहां से 70 गांवों के क्षेत्र से होकर 115 किमी. की दूरी तय करती ये नदी फर्रुखाबाद की सीमा के गांव बघरई व कम्पिल के बीच मुख्य गंगा पर समाप्त होती है। कासगंज में यह सोरों, सहावर, गंजडुंडवारा, पटियाली क्षेत्र से होकर निकलती है। 

महत्व
बूढ़ी गंगा भागीरथी और वृद्ध गंगा के नाम से धार्मिक ग्रंथों में दर्ज है। पहले मुख्य गंगा और बूढ़ी गंगा एक साथ बहती थी। बाद में धारा अलग होकर काफी दूर हो गई। तब से बूढ़ी गंगा सूखने लगी। आसपास के गांवों के लोग आज भी दाह संस्कार इसी नदी के किनारे करते हैं। इसके किनारे वाल्मीकि आश्रम, जिसे लवकुश की जन्मस्थली भी कहा जाता है, रामछितौनी, पटियाली पांचाल राज्य के धार्मिक स्थल हैं।

हिन्दुस्तान ने चलाया था अभियान
कासगंज। बूढ़ी गंगा को पुनर्जीवित करने के लिए हिन्दुस्तान ने भी वर्ष 2015-16 में बड़ा अभियान चलाया था। वर्ष 2008 में कासगंज के नया जिला बनने के बाद से इस नदी की ओर ध्यान दिया जाना बिल्कुल बंद हो गया। नदी को प्राकृतिक जल प्रवाह मिले तो ये फिर से जीवनदायिनी हो सकती है। इसके लिए लगातार लोगों के बीच जाकर बूढ़ी गंगा न होने से उपजने वाली समस्याओं को रखा गया। अभियान के चलते तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल ने कार्ययोजना के आदेश भी दिए थे।
 

 

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