
गंगा वन व भागीरथ वन बने वायुशोधन का मजबूत आधार
Agra News - दिल्ली एनसीआर की वायु गुणवत्ता खराब हो रही है, लेकिन कासगंज के गंगा वन और भागीरथ वन स्थानीय हवा को शुद्ध करने में मदद कर रहे हैं। ये वनों ने धूल और प्रदूषकों को अवशोषित कर वायु गुणवत्ता में सुधार किया है। पिछले पांच वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण और ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि हुई है।
वायु की खराब गुणवत्ता भले ही दिल्ली एनसीआर से प्रभावित हो रही हो लेकिन चंदनपुर घटियारी स्थित गंगा वन और दतलाना गांव स्थित भागीरथ वन स्थानीय स्तर पर हवा को शुद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मंगलवार को कासगंज का एक्यूआई 188 दर्ज किया गया, जो मध्यम से खराब श्रेणी की ओर संकेत करता है। पर्यावरणविद मानते हैं कि यदि ये दोनों वन क्षेत्र कासगंज में नहीं होते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। गंगा किनारे फैले करीब 412 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इन वनों ने पिछले वर्षों में कासगंज की वायु गुणवत्ता सुधारने का ठोस आधार तैयार किया है।
सोरों के चंदनपुर घटियारी में स्थित गंगा वन में 51 प्रजातियों के एक लाख 11 हजार पेड़ तथा सोरों के गांव दतलाना भागीरथ वन में तीन लाख 51 हजार पेड़ों की मौजूदगी ने न सिर्फ हरियाली बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र में माइक्रो-क्लाइमेट भी निर्मित किया है। स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इन पेड़ों की सघनता ने हवा में मौजूद धूल, स्मॉग और सूक्ष्म कणों को अवशोषित कर वायु में प्रदूषकों का स्तर कम किया है। पेड़ों की पत्तियां और तने की सतहें सूक्ष्म कण तथा धूलकण को पकड़ने में सक्षम होती हैं, जिससे आसपास की हवा तुलनात्मक रूप से अधिक स्वच्छ रहती है। साथ ही बढ़े हुए हरितावरण के कारण दिन के समय तापमान में कमी और नमी में संतुलन देखने को मिला है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में इन वनों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण और ऑक्सीजन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। भागीरथ वन विशेष रूप से स्थानीय वायुशोधन में प्रभावी साबित हुआ है, जिसने दिल्ली एनसीआर की प्रदूषित हवा के प्रभाव को कासगंज में काफी हद तक कम किया है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो गंगा वन और भागीरथ वन कासगंज के लिए प्राकृतिक एयर फ़िल्टर की तरह काम कर रहे हैं। बढ़ती हरियाली न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि जिले की वायु गुणवत्ता सुधारने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।

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