Agra News: दरिद्रों का दर्द बड़ी शिद्दत से महसूस कर कालजेई रचनाओं का संसार दे गए मुंशी प्रेमचंद
Agra News: नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन 'सभा भवन' में किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. गिरधर

Agra News: नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन 'सभा भवन' में किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं, जिनके युग का विस्तार सन 1880 से 1936 तक रहा है। यह कालखंड भारत के इतिहास में बहुत महत्व रखता है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई भी नई मंजिलों से गुजरी थी। मुख्य वक्ता प्रो.उमापति दीक्षित, विभागाध्यक्ष, सायंकालीन पाठ्यक्रम विभाग, केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने कहा कि प्रेमचंद की रचना-दृष्टि, विभिन्न साहित्य रूपों में अभिव्यक्त हुई है। वह बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न साहित्यकार थे।
वह दरिद्र नहीं थे, संपन्न थे, लेकिन दरिद्रों के दर्द को बड़ी ही शिद्दत से महसूस करते हुए उन्होंने साहित्य को कमजोर और बेसहारा वर्ग की आवाज बनाया। प्रेमचंद की रचनाओं में तत्कालीन इतिहास बोलता है। विश्व साहित्य के क्षितिज पर हिंदी साहित्य को सम्मानजनक स्थान दिलाने वाले प्रेमचंद को भारत का टॉलस्टाय कहा जाने लगा था। उनके साहित्य को पूरी दुनिया में अनुवादित कर पढ़ा गया। समारोह के अध्यक्ष और सभा के सभापति डॉ.खुगीराम शर्मा ने कहा कि जिस युग में प्रेमचंद ने कलम उठाई थी, उस समय उनके पीछे ऐसी कोई ठोस विरासत नहीं थी और न ही विचार और न ही प्रगतिशीलता का कोई मॉडल ही उनके सामने था, सिवाय बांग्ला साहित्य के। कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त करते हुए मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व व कृतित्व के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला। समारोह का सफल संचालन करते हुए सभा की उप सभापति प्रो.कमलेश नागर ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने जीवन में कई अद्भुत कृतियों लिखी हैं। तब से लेकर आज तक हिन्दी साहित्य में न ही उनके जैसा हुआ है, और न ही कोई और होगा। सभा के मंत्री प्रो.चंद्रशेखर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने कहानी लेखन का ट्रेंड ही बदल दिया। यही कारण है कि उन्हें आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का सबसे बड़ा मथार्थवादी लेखक माना जाता है। डॉ.शशि तिवारी ने सरस्वती वंदना का पाठ किया। डॉ.ब्रज बिहारी बाल वर्मा बिरजू ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य वक्ता प्रो.उमापति दीक्षित का परिचय डॉ.मधु भारद्वाज ने दिया। मुख्य अतिथि डॉ.गिरधर शर्मा का परिचय डॉ. विनोद माहेश्वरी ने दिया। इस अवसर पर प्रो.आभा चतुर्वेदी, डॉ.नीलम भटनागर, डॉ.मधुरिमा शर्मा, डॉ.हरबंस पांडेय, रमेश पंडित, डॉ.महेश धाकड़, नंदनंदन गर्ग, ओम स्वरूप गर्ग, लखमीचंद, शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ, शरद गुप्त, रामेंद्र शर्मा रवि, शैल अग्रवाल, नूतन अग्रवाल, सपना सिंह, मनीष सिंह, हेमंत कुमार द्विवेदी, प्रकाश गुप्ता, शीलेंद्र वर्मा, डॉ.यशोयश, प्रकाश चंद्र अग्रवाल, खुशी सिंह, उमा शंकर पाराशर आदि मौजूद रहे।


