किशोरी को अपहृत कर बेचा, तीन दोषियों को उम्र कैद
Agra News - आगरा की विशेष अदालत ने किशोरी के अपहरण, दुराचार और एससी-एसटी एक्ट के मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश ने तीन आरोपियों को जीवन कारावास और जुर्माना सुनाया। एक आरोपी को 7 वर्ष की सजा और एक महिला आरोपी को एक वर्ष की सजा दी गई। पीड़िता को पुलिस ने बरामद किया।

किशोरी के अपहरण, उसे बेचने, दुराचार और एससी-एसटी ऐक्ट के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है। फैसला आगरा की विशेष अदालत में सुनाया गया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी ऐक्ट शिव कुमार ने आरोपी प्रीतम, हाकिम और विजयपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। आरोपी बाबू को अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में 7 वर्ष के कारावास की सजा दी। उस पर 41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। एक महिला आरोपी को बंधक बनाने के आरोप में एक वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया।
अभियोजन की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए। वादी, पीड़िता, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी असीम चौधरी और डॉक्टर समेत 6 गवाह पेश किए गए। वादी और पीड़िता की गवाही को अदालत ने अहम माना। वादी ने थाना मलपुरा में एक जून 2007 को तहरीर दी थी। आरोप था कि एक अप्रैल 2007 को उसकी 15 वर्ष की पुत्री को प्रीतम घर से आलू खोदने के बहाने ले गया। पीड़िता को ट्यूबवेल के कमरे में बंधक बनाया गया। कट्टा दिखाकर धमकाया गया। इसके बाद पीड़िता को ट्रक से इटावा ले जाया गया। वहां बाबू और एक महिला ने 10 दिन तक बंधक रखा। पीड़िता को आगे सिसिया का नगला ले जाया गया। वहां उसे 50 हजार रुपये में विजयपाल को बेच दिया गया। विजयपाल ने 20-25 दिन तक पीड़िता को रखा। वादी ने पुलिस की मदद से पुत्री को बरामद कराया था।
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