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अपहरण के बाद बेखौफ शहर में घूमे थे बदमाश

प्रतापपुरा से बदमाश गाड़ी लेकर खंदौली के मुड़ी चौराहे तक पहुंच गए। एसएसपी खुद सड़क पर थे। पूरे जिले में हाई अलर्ट था। सारे-थाने-चौकी खाली करा दिए गए थे। फिर भी पुलिस का बदमाशों से आमना-सामना नहीं हुआ। भला हो उन ग्रामीणों का, जिन्होंने शक होने पर बदमाशों को टोक दिया था। ग्रामीण नहीं आते तो पुलिस अपने दबाव का ढिंढोरा नहीं पीट पाती।

सोमवार शाम करीब सात बजे एलआईसी अधिकारी धर्मेंद्र कुमार उपाध्याय के बेटे अर्पित का कार सहित अपहरण हुआ था। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई थी। जिले में चेकिंग का आदेश हुआ था। मुड़ी चौराहा एक-दो किलोमीटर दूर नहीं है। प्रतापपुरा से सीधे रास्ते जाएं तो लगभग 21 किलोमीटर दूर है। यहां तो बदमाशों की आखिरी लोकेशन मारुति एस्टेट मिली थी। इसी से आशंका जताई जा रही है कि वे बोदला-सिकंदरा मार्ग होते हुए एनएच टू पर आए। यहां से रामबाग, टेढ़ी बगिया होते हुए मुड़ी चौराहा पहुंचे।

पुलिस जिस रास्ते से बदमाशों के भागने की आशंका जता रही है उस रास्ते पर सात थानों की सीमा है। हकीकत तो यह है कि तीन बदमाशों ने आगरा पुलिस की कलई खोलकर सामने रख दी थी। पुलिस की नाकाबंदी कितनी कारगर है, यह फिर सामने आया है। प्रतापपुरा रकाबगंज थाने में आता है। पुलिस लाइन मार्ग नाई की मंडी थाना क्षेत्र में है। मारुति एस्टेट शाहगंज और बोदला सिकंदरा मार्ग पर जगदीशपुरा थाना क्षेत्र की सीमा लगती है। सिकंदरा, न्यू आगरा, एत्मादुद्दौला बदमाश इन थाना क्षेत्रों से होते हुए भागे थे। किसी भी चौराहे और तिराहे पर पुलिस ने बिना नंबर की बलेनो कार को नहीं पकड़ा।

बदमाश भीड़भाड़ वाले हाथरस मार्ग पर चले। टेढ़ी बगिया से होते हुए मुड़ी चौराहा पहुंच गए। टेढ़ी बगिया ऐसा क्षेत्र है, जहां शाम को पैदल चलना भी चुनौती से कम नहीं है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नाकाबंदी के समय पुलिस कितना अलर्ट थी। ग्रामीण बदमाशों को नहीं टोकते तो बदमाश भागने के लिए भी कोई न कोई रास्ता खोजते। ग्रामीणों के टोकने के दौरान अर्पित को मौका मिल गया था। वह गाड़ी से कूदकर एक हॉस्टल में भाग गया था।

शहर से बाहर निकलने के 83 रास्ते

जब भी बड़ी वारदात होती है पुलिस बदमाशों को नहीं पकड़ पाती है। वे घटना करते हैं और आराम से भाग जाते हैं। सालों से यही स्थिति है। पूर्व में आईजी सुजीत पांडेय ने नाकाबंदी स्कीम बनाई थी। इसमें 83 स्थान चिन्हित किए गए थे। तय हुआ था, सेट पर नाकाबंदी लागू, यह बोलते ही पुलिसकर्मी इन 83 स्थानों पर बैरियर लगा देंगे। ऐसा करने पर बदमाश जिले से बाहर नहीं निकल पाएंगे। किस बैरियर पर किस थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी की ड्यूटी होगी, यह भी तय था। अधिकारी गए और योजना फाइल में बंद हो गई।

दस मिनट पेट्रोल पंप पर रुके

पुलिस जगह-जगह चेकिंग कर रही थी। बदमाश पुलिस को देखकर घबरा गए। पुलिस के इस दावे की पोल बदमाशों ने खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बदमाश हाथरस मार्ग स्थित पेट्रोल पंप पर दस मिनट रुके थे। वे पुलिस से भयभीत होते तो दस मिनट रुकने की हिम्मत नहीं जुटाते। हकीकत यह है कि उन्हें अब क्या करना है, यह दिशा निर्देश नहीं मिल पा रहे थे। वे अपने सरगना को फोन मिला रहे थे, मगर उससे बात नहीं हो पा रही थी। खुद अर्पित ने पूछताछ के लिए दौरान पुलिस को यह बताया।

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