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9 अगस्त, 2020|8:27|IST

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सात वचनों की मजबूत डोर बना 'आठवां फेरा'

सात वचनों की मजबूत डोर बना 'आठवां फेरा'

1 / 2सात वचन और आठवां फेरा, सम्मान और समानता के इस अनोखे वचन को लेते हुए जोड़े फूले नहीं समा रहे थे। मंडप में हाथों में हाथ डालकर दंपति ने फेरे लिए। मौका था आपके अखबार हिन्दुस्तान की ओर से देहली गेट स्थित...

सात वचनों की मजबूत डोर बना 'आठवां फेरा'

2 / 2सात वचन और आठवां फेरा, सम्मान और समानता के इस अनोखे वचन को लेते हुए जोड़े फूले नहीं समा रहे थे। मंडप में हाथों में हाथ डालकर दंपति ने फेरे लिए। मौका था आपके अखबार हिन्दुस्तान की ओर से देहली गेट स्थित...

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सात वचन और आठवां फेरा, सम्मान और समानता के इस अनोखे वचन को लेते हुए जोड़े फूले नहीं समा रहे थे। मंडप में हाथों में हाथ डालकर दंपति ने फेरे लिए। मौका था आपके अखबार हिन्दुस्तान की ओर से देहली गेट स्थित चोखो जीमण रेस्टोरेंट में आयोजित आठवां फेरा कार्यक्रम का। बैठक और कॉसमॉस मॉल में आयोजित फेरे के दौरान उपस्थित दंपतियों ने आठवें फेरे पर खुलकर चर्चा की।

रिश्तों की कड़ियों को जोड़ने वाला आयोजन

आठवें फेरे की जरूरत क्यों है, इस पर भी चर्चा की गई। दंपतियों का कहना था कि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच गलतफहमी या अन्य कारणों से दूरी हो जाती है। अगर उसे समझा न जाए तो मामला अलगाव तक जाता है। हिन्दुस्तान की इस पहल से कहीं न कहीं इन कड़ियों को जोड़ता है। आठवां फेरा और सम्मान के इस वचन को शहर के दंपतियों ने खूब सराहा।

मैं हर हाल में निभाऊंगा आठवां वचन

आठवें फेरे कार्यक्रम में डा. अशोक चड्ढा और मधु चड्ढा के प्यार ने सबको भावुक कर दिया। घुटने ट्रांसप्लांट के कारण डा. अशोक चल-फिर नहीं पा रहे थे। लेकिन आठवां फेरा और पत्नी की खुशी के आगे उन्होंने अपने दर्द को भुला दिया। आपके अखबार हिन्दुस्तान के कार्यक्रम में पहुंचे। दोनों ही पति-पत्नी काफी खुश नजर आ रहे थे तो वहीं पत्नी भावुक थीं। जब दोनों ने आठवां फेरा लिया तो डॉक्टर अशोक बोले, जब तक मैं जिंदा हूं अपनी पत्नी की हर खुशी का ख्याल रखना मेरा धर्म है। मैं हर हाल में साथ निभाऊंगा।

सात फेरों के साथ 'आठवां फेरा' अब जरूरी है

आठवें फेरे को सुनकर ही बहुत अच्छा लगा। हम लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि आखिर आठवां फेरा है क्या? लेकिन जब यहां आकर देखा तो बयां नहीं कर सकते हैं कि हमारे अनुभव शादी की यादें सब ताजा हो गईं। इस दौरान डा. शोनू मेहरोत्रा ने बताया कि हमारे समाज में एक-एक फेरे और अग्नि का महत्व है। हर फेरा और मांग में सिंदूर लगाना मानसिक स्थिति बिल्कुल बदल देता है। एक अहसास होता है बदलाव का। जिस प्रकार सात फेरों की शादी मान्य हैं। वैसे ही आज यह सम्मान और समानत का आठवां फेरा जरूरी है।

इस आयोजन ने पूरे शहर में धूम मचा दी है

करवाचौथ के इस अवसर पर आपके अखबार हिन्दुस्तान ने जो यह कार्यक्रम आयोजित किया है वह शहर भर में चर्चा का विषय है। संजय मेहरा बोले कि मेरी पत्नी ने कहा कि चलिए। बस मैं मना नहीं कर सका। क्योंकि इस प्रकार के कार्यक्रम की आवश्यकता है। आज पति-पत्नी के बीच जो दूरियां बढ़ रहीं हैं। उनको खत्म और दूर करने का बेहतर मंच है। जहां शहर के बुद्धिजीवी ऐसे कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे हैं। पति-पत्नी के इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं। जिससे कहीं न कहीं समस्याओं का समाधान निकलकर आ रहा है।

25 साल की शादी में यादगार करवाचौथ

पवन मेहरोत्रा और शोनू मेहरोत्रा का कहना है कि हिन्दुस्तान को हृदय से बधाई। करवाचौथ को बेहतर ढंग से मनवाया। एक सम्मान और संदेश दिया। 25 साल की शादी में सबसे यादगार करवाचौथ है।

इससे बेहतर करवाचौथ नहीं हो सकती

प्रतिभा जिंदल का कहना है कि मेरे पति और मेरे बीच की बांडिंग हर दिन करवाचौथ जैसी है। लेकिन मैं हिन्दुस्तान को धन्यवाद देती हूं कि इससे बेहतर करवाचौथ नहीं हो सकती है। समाज को संदेश देने वाला पहला कार्यक्रम है।

मेरे पति आठवां वचन हमेशा निभाते हैं

डा. शिवानी मिश्रा का कहना है मेरा मानना है कि महिला और पुरुष दोनों ही एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। करवाचौथ पर हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने खास बना दिया है। मेरे पति आशीष वैसे इस वचन को हमेशा निभाते हैं।

आठवें फेरे ने संबंधों की गहराई को समझाया

कभी-कभी पति-पत्नी अपनी बातों को समझ नहीं पाते हैं। एक तीसरे समझाने वाले की भूमिका अहम होती है। यह आठवां फेरा ऐसे दंपत्तियों के लिए जरूरी है। काजल और राजेश का यही मानना है। हम लोग हिन्दुस्तान अखबार को धन्यवाद देते हैं।

हिन्दुस्तान ने दिया करवाचौथ का तोहफा

दयालबाग निवासी राहुल और ज्योति फूले नहीं समा रहे। राहुल का कहना था कि मैं सोच रहा था कि पत्नी की इस करवाचौथ को कैसे खास बनाऊं। धन्यवाद हिन्दुस्तान पत्नी की करवाचौथ को इस बार बहुत खास बना दिया।

आठवें फेरे की वाकई समाज को है

विशाल माटा और शैली माटा का कहना है कि मैं यह सोचता हूं कि इतना हटकर कांसेप्ट है वाकई धन्यवाद का पात्र है हिन्दुस्तान। अगर आप देखें तो इस आठवें फेरे की आवश्यकता वाकई समाज को है। सम्मान और समानता जरूरी है।

हिन्दुस्तान ने करवाचौथ को खास बनाया

सविता मीणा और राकेश मीणा का कहना है कि हिन्दुस्तान ने जहां करवाचौथ को खास बनाया है। वहीं समाज को एक विशेष संदेश दिया है। अगर पति-पत्नी के रिश्ते ठीक हो सकते हैं। तो इससे बेहतर तरीका नहीं। धन्यवाद हिन्दुस्तान ।

हर पत्नी को खुश रखना पति का धर्म

पिंकी के पति पुनीत का कहना है कि मेरी पत्नी की खुशी सर्वोपरि है। हिन्दुस्तान के इस कार्यक्रम में मेरी पत्नी का आने का बहुत मन था मुझे भी यहां आकर बहुत अच्छा लगा। मेरी पत्नी मेरी सुप्रीम कोर्ट है। हर पत्नी को खुश रखना पति का धर्म है।