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'नहीं चाहिए उबला खाना, हमें चाहिए बड़े की बिरयानी'

'ये भी कोई खाना है। इसमें न नमक है, न मिर्च। सूखा खाना हमें नहीं खाना। हमें तो बड़े (भैंसे) की बिरयानी चाहिए। वरना हम यहां 14 दिन रुकने वाले नहीं हैं। कोई दवा नहीं खाएंगे, न इंजेक्शन लगवाएंगे। हम...

'नहीं चाहिए उबला खाना, हमें चाहिए बड़े की बिरयानी'
हिन्दुस्तान टीम,आगराFri, 03 Apr 2020 12:41 AM
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'ये भी कोई खाना है। इसमें न नमक है, न मिर्च। सूखा खाना हमें नहीं खाना। हमें तो बड़े (भैंसे) की बिरयानी चाहिए। वरना हम यहां 14 दिन रुकने वाले नहीं हैं। कोई दवा नहीं खाएंगे, न इंजेक्शन लगवाएंगे। हम पूरी तरह स्वस्थ हैं। हमें साजिश के तहत यहां लाया गया है।'

ये डायलॉग उन जमातियों के हैं, जिन्हें मधु रिसोर्ट में क्वारंटाइन किया गया है। डॉक्टरों की टीम, पैरा मेडिकल स्टाफ इनकी सेवा में लगा है। कोशिश है कि कोरोना की स्थिति में इनकी जान बचाई जाए। मगर जमाती हैं कि मानते ही नहीं। उल्टे प्रशासन और डाक्टरों पर आरोप लगा रहे हैं। गुरुवार को इन्होंने तमाम डाक्टरों से कहा कि उन्हें यहां क्यों लाया गया है। वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। खाना एकदम बकवास दिया जा रहा है।

उन्हें मरीजों का खाना क्यों दिया जा रहा है। इस खाने में नमक और मिर्च तक का स्वाद नहीं है। वे तीखा और चटपटा खाना खाने के आदी हैं। हद तो तब हुई जब उन्होंने डाक्टरों से बड़े (भैंसे) की बिरयानी मांग ली। जमातियों का कहना था कि वे रोज यही बिरयानी खाते हैं। यह उनके मीनू का जरूरी हिस्सा है। नाम न छापने की शर्त पर डाक्टरों ने बताया कि कोई भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहा है। सभी के लिए अलग बेड हैं। वे लोग एक ही स्थान पर इकट्ठा होकर नमाज अदा कर रहे हैं। डाक्टरों ने कहा था कि सभी अपने बेड के करीब रहकर नमाज अदा कर सकते हैं। या ऐसा करने के लिए एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाकर रख सकते हैं। मगर जमाती मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने देखरेख में लगे लोगों को धमका दिया है। उनका कहना है कि यही चलता रहा तो वे 14 दिन तक यहां किसी कीमत पर रहने को तैयार नहीं हैं।

साजिशन लगा रहे इंजेक्शन

क्वारंटाइन लोगों में से एक महाशय ने दूसरे से कहा कि उन्हें यहां साजिश के तहत लाया गया है। निजामुद्दीन में जमात करके आए लोग हमेशा मस्जिदों में जाकर स्थानीय लोगों को मौलानाओं की तकरीर सुनाते हैं। पुलिस ने तकरीर सुनने आए लोगों को उठा लिया है। सभी को बेवजह साजिशन इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। यह इंजेक्शन किसके हैं, यह भी उन्हें पता नहीं हैं। वे पूरी तरह स्वस्थ हैं फिर इलाज क्यों हो रहा है।

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