आगरा में लाइसेंस नवीनीकरण न होने से एक हजार हथियार अवैध हो गए
आगरा में एक हजार शस्त्र लाइसेंस अवैध हैं। पिछले 15 वर्षों से इनका नवीनीकरण ही नहीं हुआ है। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद एनओसी न मिल पाने और कुछ लाइसेंसों के अन्य कारणों से नवीनीकरण नहीं हो पाए।

जिले में एक हजार शस्त्र लाइसेंस अवैध हैं। पिछले 15 वर्षों से इनका नवीनीकरण ही नहीं हुआ है। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद एनओसी न मिल पाने और कुछ लाइसेंसों के अन्य कारणों से नवीनीकरण नहीं हो पाए। बिना नवीनीकरण के घरों पर शस्त्र लाइसेंस अवैध रूप से रखे हुए हैं।
जिले में लगभग 60 हजार शस्त्र लाइसेंस हैं। इनमें एसबीएल, डीबीबीएल, राइफल, रिवाल्वर, पिस्टल शामिल हैं। पिछले 15 वर्षों में सेना से रिटायर होने के बाद सैन्यकर्मी जिले में अपने घर आ जाता है। उसके बाद उसकी तैनाती वाले पद (रिटायरमेंट) वाले जिले में एनओसी के लिए रिपोर्ट मांगी जाती है, लेकिन वहां से सूचना न मिल पाने के कारण जिले के रिकार्ड में उनके शस्त्र लाइसेंस को दर्ज नहीं किया जा पा रहा है। ऐसे सैकड़ों प्रकरण हैं, जिनमें रिपोर्ट न आ पाने के कारण उनके शस्त्र लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं हो सका है।
शस्त्र लाइसेंसों की रिपोर्टें सबसे ज्यादा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, आसाम से नहीं आ पा रहीं हैं। रिपोर्ट के कारण नवीनीकरण न हो पाने पर ये शस्त्र लाइसेंस लोगों के घरों पर ही रखे हैं। एडीएम सिटी यमुनाधर सिंह चौहान ने बताया कि कुछ लोग जो ज्यादा भागदौड़ कर लेते हैं। वह अपनी रिपोर्ट लगवाकर ले आते हैं तो उनके शस्त्र लाइसेंसों का नवीनीकरण करा दिया जाता है। जो नहीं ला पाते हैं। उनके लाइसेंस नवीनीकृत नहीं हो पाते।
ये हैं नियम
यदि शस्त्र लाइसेंस नवीनीकृत नहीं हुआ तो वह अमान्य हो जाता है
अवधि खत्म होने के बाद हथियार रखना या इस्तेमाल करना अवैध होता है
इस स्थिति में जानकारी होने पर कानूनी कार्रवाई का जोखिम रहता है
आर्म्स एक्ट के तहत जुर्माना, हथियार जब्ती और कुछ मामलों में जेल भी हो सकती है
लाइसेंस समाप्त होते ही शस्त्र को नजदीकी पुलिस थाने,आर्म्स डीलर या अधिकृत मलकाना में जमा करना जरूरी होता है।
शस्त्र लाइसेंसों के फर्जीवाड़े की चल रही जांच
आयुध कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा कम से कम 100 से अधिक लाइसेंसों के यूनिक आईडी नंबरों में बदलाव किया गया पाया गया था, जिससे असल धारक के नाम पर गलत लाइसेंस दर्ज हो गए। कई सेना जवान भी इस धोखे का शिकार बने जिससे मामला और गंभीर हो गया। इसका खुलासा =भी हुआ। यही नहीं शस्त्र लाइसेंस पोर्टल की लॉगिन आईडी/पासवर्ड के जरिये दूसरे जिलों के लाइसेंस धारकों के नाम-पते बदले गए। कुछ मामलों में हथियार अवैध रूप से ख़रीदे गए और फर्जी दस्तावेज़ इस्तेमाल किए गए। शस्त्र लाइसेंस के फर्जी दस्तावेज, यूआईएन छेड़छाड़ और गलत जारी लाइसेंस के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एसटीएफ और प्रशासन जांच कर रहे हैं, कुछ कर्मचारियों पर चार्जशीट और कार्रवाई भी हुई है। एसटीएफ ने मामले में 100 से अधिक दस्तावेज़ जब्त किए हैं। सेवानिवृत्त शस्त्र लिपिक संजय कपूर और निलंबित कर्मचारी प्रशांत कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
अब पांच वर्षों के लिए शस्त्र लाइसेंसों का नवीनीकरण होता है। यदि पांच साल से नहीं हुआ है तो दो हजार रुपये प्रति पांच वर्ष के अनुसार पैनाल्टी लगती है। उसके बाद उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी होती है। पूर्व सैनिकों के लाइसेंसों की जानकारी नहीं हो पाती है। जो नवीनीकरण के लिए एनओसी लेकर आ जाते हैं। उनके शस्त्र लाइसेंसों को नवीनीकृत कर दिया जाता है।
यमुनाधर चौहान, एडीएम सिटी
लेखक के बारे में
Manoj Mishraशॉर्ट बायो : मनोज मिश्र पिछले 28 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान' हिंदी आगरा में सिटी चीफ की भूमिका में कार्य कर रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता पर्यटन से जुड़ी रिपोर्टिंग में है।
परिचय एवं अनुभव
मनोज मिश्र को हिंदी पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। उन्होंने 1997 में अमर उजाला आगरा से पत्रकारिता की शुरुआत की। 28 साल के प्रिंट मीडिया के अनुभव के साथ उनका एक प्रतिष्ठित नाम है। प्रशासनिक बीट के साथ पर्यटन से जुड़ी कवरेज लगातार कर रहे हैं।
करियर का सफर
1997 से पत्रकारिता में सक्रिय। 2006 में वह 'हिन्दुस्तान' से जुड़े। मौजूदा समय में 'हिन्दुस्तान' आगरा में विशेष संवाददाता के पद पर हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पर्यटन रिपोर्टिंग
बीएससी (मैथ्स), एलएलबी, एमबीए के अलावा मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट के बाद उच्च शिक्षा का उन्हें फायदा मिला। पर्यटन और एएसआई की रिपोर्टिंग के साथ उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत 30 राष्ट्राध्यक्षों को कवर किया है। आगरा में भारत-पाक शिखर वार्ता की भी रिपोर्टिंग की।
राजनीतिक कवरेज
पिछले करीब 25 साल से राजनीतिक-चुनावी कवरेज कर रहे हैं।
विशेषज्ञता
पर्यटन, पुरातत्व
राजनीतिक, चुनावी, प्रशासनिक
सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
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