बच्चों की लड़ाई में कानून ही भूल गई पुलिस, छात्र पर केस में दारोगा और दो सिपाही निलंबित

Yogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, आगरा, मुख्य संवाददाता
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आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में दो नाबालिग छात्रों के बीच हुई मारपीट के मामले में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करना सिकंदरा थाना पुलिस को भारी पड़ गया। दारोगा और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

बच्चों की लड़ाई में कानून ही भूल गई पुलिस, छात्र पर केस में दारोगा और दो सिपाही निलंबित

यूपी के आगरा में शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में कक्षा दस के नाबालिग छात्र से मारपीट के मामले में मुकदमा लिखना सिकंदरा थाना पुलिस को भारी पड़ गया। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (जेजे ऐक्ट) में नाबालिग के खिलाफ मुकदमा लिखने से पहले उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करना था। पुलिस जेजे ऐक्ट से अनजान रही। मुकदमा लिखने की जानकारी पर डीसीपी सिटी ने एक दरोगा और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। लापरवाही पर इंस्पेक्टर सिकंदरा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के साथ ही पुलिस आयुक्त को कार्रवाई के लिए लिखा गया है।

यूट्यूबर पीयूष मल्होत्रा के बेटे का स्कूल में दूसरे छात्रों से विवाद हुआ था। एक छात्र ने मुंह पर घूंसा मारा तो चार दांत टूट गए। पीयूष ने स्कूल से ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। दूसरे दिन अस्पताल से और वीडियो वायरल किए। इस मामले में आरोपित छात्र और स्कूल प्रशासन के खिलाफ सिकंदरा थाने में तहरीर दी गई। कुछ लोग इस मामले में डीएम से भी मिले थे। इंस्पेक्टर सिकंदरा प्रदीप त्रिपाठी ने तहरीर मिलने पर एक दरेागा को जांच के आदेश दिए थे।

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डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने थाना पुलिस को बताया था कि जेजे ऐक्ट में सात साल से कम सजा वाले अपराध में नाबालिग के खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज नहीं होता है। नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। किशोर न्याय बोर्ड के आदेश पर ही पुलिस अग्रिम कार्रवाई करती है। स्पष्ट आदेश के बावजूद सिकंदरा पुलिस जेजे ऐक्ट भूल गई। सोमवार रात ढाई बजे इंस्पेक्टर सिकंदरा प्रदीप त्रिपाठी ने घटना की जीडी एंट्री करने के लिए सिपाही (मुंशी) से कहा। मुंशी ने तहरीर के आधार पर सीधे मुकदमा दर्ज कर लिया। मुकदमे की जानकारी मंगलवार की सुबह अधिकारियों को हुई तो हड़कंप मच गया। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने लापरवाही के आरोप में नाइट इंचार्ज दरोगा मानपाल, आरक्षी मुंशी सनी धामा और कमल चंदेल को निलंबित कर दिया। इंस्पेक्टर सिकंदरा प्रदीप त्रिपाठी के खिलाफ पुलिस आयुक्त दीपक कुमार को रिपेार्ट भेजी है। उनके संबंध में पुलिस आयुक्त के स्तर से कोई निर्णय लिया जाएगा।

सवाल: कानून के पालन से कैसे चूक गई पुलिस

आगरा। स्कूल में दो बच्चों की लड़ाई में पुलिस कानून का पालन करने में कैसे चूक गई, यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। डीसीपी सिटी के आदेश के बावजूद सिकंदरा थाना पुलिस बड़ी गलती कर बैठी। माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो चलने और पुलिस पर कार्रवाई के लिए दबाव पड़ने के चलते अफरातफरी में यह गलती हो गई। नियमानुसार जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट में नाबालिग के खिलाफ मुकदमा लिखने से पहले उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करना था।

इस मामले में गलत तरीके से एफआईआर दर्ज होने से अधिकारी नाराज हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्पष्ट आदेश के बावजूद चूक कैसे हुई। अधिकारियों ने भी इस मामले में पहले किशोर न्याय बोर्ड से जेजे ऐक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी ली थी। कानूनी राय के बाद यह फैसला किया गया था कि सिर्फ जीडी में घटना को लिखा जाएगा। मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज हो गया तो अधिकारियों के होश उड़ गए।

कानून के जानकारों को कहना है कि दबाव के चलते पुलिस से यह चूक हुई है। यह गलत है कि कानून का दायरा सोशल मीडिया से तय कर दिया गया। घटना के बाद डीपीएस के प्रिंसिपल ने स्पष्ट रूप से इसे दो छात्रों के बीच के झगड़े का बयान जारी किया था। इसे हमला नहीं माना था।

नाबालिग के खिलाफ कब हो सकता है मुकदमा

नाबालिग ने ऐसा अपराध किया हो, जिसमें सात साल से अधिक की सजा का प्रावधान है, या वह किसी गंभीर प्रवृत्ति के अपराध में शामिल हो—जैसे हत्या, जानलेवा हमला या दुराचार। यदि नाबालिग किसी ऐसे अपराध में शामिल हो, जिसमें उसके साथ बालिग भी शामिल हों, तो ऐसी स्थिति में पुलिस मुकदमा दर्ज कर सकती है।

हालांकि, ऐसे मामलों में भी पुलिस नाबालिग को बाल अपचारी ही मानेगी। उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया कानून के निर्धारित प्रावधानों के तहत ही आगे बढ़ेगी। साथ ही, उसे बालिग आरोपियों से अलग रखा जाएगा और उसके अधिकारों का ध्यान रखा जाएगा।

किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष छात्र पेश

छात्र के साथ मारपीट के मामले में आरोपित छात्र को सिकंदरा पुलिस ने मंगलवार को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया। किशोर न्याय बोर्ड ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इसकी जानकारी बुधवार को पुलिस को मिलेगी। किशोर न्याय बोर्ड के आदेश पर पुलिस ने छात्र को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के अनुसार सिकंदरा थाने में नाबालिग के खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा खारिज करने के आदेश दिए गए हैं। जिन पुलिस कर्मियों ने लापरवाही बरती उन्हें निलंबित किया गया है। इस मामले में पुलिस वही कार्रवाई करेगी जो आदेश किशोर न्याय बोर्ड देगा। मामला स्कूल में दो छात्रों के बीच मारपीट का है। दोनों नाबालिग हैं। एसएचओ के खिलाफ विभागीय जांच की कार्रवाई की गई है।

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लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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