अग्निवीर भर्ती: मिलिट्री पुलिस बनने के लिए दौड़ीं सैकड़ों बेटियां, चार की बिगड़ी हालत
लखनऊ में अग्निवीर महिला मिलिट्री पुलिस भर्ती रैली के पहले दिन यूपी और उत्तराखंड की 1000 बेटियों ने हिस्सा लिया। 1.6 किमी की कठिन दौड़ के दौरान चार युवतियां बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

भारतीय सेना की वर्दी पहनने और देश सेवा के अटूट जज्बे के साथ बुधवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की बेटियों ने लखनऊ की धरती पर अपना दमखम दिखाया। लखनऊ छावनी स्थित एएमसी सेंटर एवं कॉलेज के स्टेडियम में 'अग्निवीर महिला मिलिट्री पुलिस' भर्ती रैली का भव्य आगाज हुआ। कड़ाके की ठंड और सुबह की ओस भी इन बेटियों के हौसलों को डिगा नहीं सकी। रैली के पहले दिन शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान युवतियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हालांकि, सेना का हिस्सा बनने के इस कड़े संघर्ष में शारीरिक थकान और अत्यधिक परिश्रम के कारण चार महिला अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई और वे ट्रैक पर ही बेहोश हो गईं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
तड़के 4 बजे से ही सज गई थी उम्मीदों की कतार
भर्ती कार्यालय (मुख्यालय) लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित इस रैली के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से लगभग 1,000 मेधावी अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। ये वे जांबाज बेटियां हैं जिन्होंने जुलाई 2025 में आयोजित ऑनलाइन साझा प्रवेश परीक्षा (सीईई) में सफलता हासिल की थी। बुधवार तड़के जब शहर गहरी नींद में था, तब 4:00 बजे से ही स्टेडियम के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। हाथों में प्रवेश पत्र और आँखों में सेना में शामिल होने का सपना लिए इन युवतियों के दस्तावेजों की गहन जांच के बाद उन्हें शारीरिक परीक्षण के लिए मैदान में प्रवेश दिया गया।
1.6 किमी की दौड़ और चार राउंड का संघर्ष
अग्निवीर जनरल ड्यूटी (महिला मिलिट्री पुलिस) के लिए चयन प्रक्रिया का सबसे कठिन हिस्सा 1.6 किलोमीटर की दौड़ रही। ऊबड़-खाबड़ चुनौती और तय समय सीमा के भीतर दौड़ पूरी करने के दबाव के बीच मुकाबला बेहद कड़ा था। इसी दौरान दौड़ के अंतिम चरणों में चार लड़कियां अचानक चक्कर खाकर ट्रैक पर गिर पड़ीं। तीन से चार राउंड लगाने के बाद शरीर ने जवाब दे दिया और वे बेहोश हो गईं। मौके पर मुस्तैद सैन्य चिकित्सा दल ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें सेना की एम्बुलेंस से कमांड अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, अत्यधिक परिश्रम और तनाव के कारण उनकी हालत बिगड़ी थी, फिलहाल वे स्थिर हैं।
पारदर्शिता और कड़े मापदंडों पर चयन
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त है। बायोमेट्रिक पहचान और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए प्रत्येक अभ्यर्थी के प्रदर्शन को रिकॉर्ड किया जा रहा है। शारीरिक दक्षता परीक्षा (PFT) के बाद सफल अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि केवल वही बेटियां सेना की इस महत्वपूर्ण इकाई का हिस्सा बन पाएंगी जो शारीरिक और मानसिक रूप से सेना के सख्त मापदंडों पर खरी उतरेंगी। पहले दिन की दौड़ ने यह साबित कर दिया कि देश सेवा के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की युवतियों में जबरदस्त उत्साह है।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को देख रहे हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं। पत्रकारिता में 25 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। सिटी टीम का नेतृत्व भी किया। बीकॉम में ग्रेजुएट और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर रिपोर्टिंग भी की है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।
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