यूपी में ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष भी प्रशासक बने, कल खत्म होना है कार्यकाल
यूपी में ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। प्रमुख सचिव, पंचायती राज ने शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किए जाने का आदेश जारी कर दिया है।

यूपी में योगी सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाने का निर्णय लिया है। शनिवार को इनका पांच साल का कार्यकाल खत्म हो रहा था। ऐसे में यह निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ही अगला चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। यह पहला मौका है जब इन्हें प्रशासक के रूप में जिला पंचायत की कमान सौंपी गई है।
प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया है। सभी 75 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल शनिवार को खत्म हो रहा था। वर्ष 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीतकर आए जिला पंचायत अध्यक्षों की पहली बैठक 12 जुलाई 2021 को हुई थी। ऐसे में पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर इन निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक के रूप में बागडोर सौंपी गई है।
इससे पहले 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें प्रशासक नियुक्त किया गया था। अब 19 जुलाई को ब्लॉक प्रमुखों का भी पांच साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में पंचायती राज विभाग की ओर से उन्हें भी प्रशासक बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा है। यह पहला अवसर है जब ग्राम प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक की कुर्सी सौंपी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने में अभी समय लगेगा। ऐसे में चुनाव होने तक यह प्रशासक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान में पहले ही ग्राम प्रधानों को कार्यकाल खत्म होने पर प्रशासक बनाया गया था।
प्रधान को प्रशासक बनाए जाना का मामला कोर्ट में
दूसरी ओर इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट की ओर से ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर सवाल पूछे गए हैं। ऐसे में विभाग भी फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। अभी तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में तैनात हैं और उन्हें हटाया नहीं गया है। आज भी इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई थी। अब मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। न्यायालय ने कहा कि हम यह भी देखेंगे कि समय से चुनाव न कर पाने में सरकार की विफलता रही है अथवा नहीं। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने पारित किया है। न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की वैधता पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में हाईकोर्ट ने इसी प्रकार के प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के विपरीत मानते हुए असंवैधानिक ठहराया था। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उस मामले में कानून के प्रश्नों को खुला छोड़ते हुए अपील का निस्तारण कर दिया था।


