वैलेंटाइन-डे पर प्रेमिका से कहासुनी के बाद प्रेमी ने चुना मौत का रास्ता, कमरे के अंदर लगाई फांसी
रामपुर में वेलेंटाइन डे के दिन बिलासपुर थाना क्षेत्र में एक लव स्टोरी का दुखद अंत हो गया। प्रेमिका से कहासुनी के बाद प्रेमी ने मौत का रास्ता चुन लिया और घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

यूपी के रामपुर में वेलेंटाइन डे के दिन बिलासपुर थाना क्षेत्र में एक लव स्टोरी का दुखद अंत हो गया। प्रेमिका से कहासुनी के बाद प्रेमी ने मौत का रास्ता चुन लिया और घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि युवती ने 'प्यार की परीक्षा' मांगी थी, जिससे उपजे विवाद में युवक ने यह आत्मघाती कदम उठाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
नगर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की शिव विहार कॉलोनी निवासी गगन सागर (पुत्र ओमप्रकाश सागर) रुद्रपुर-बिलासपुर बॉर्डर स्थित चीमा कॉलोनी में किराए पर कमरा लेकर रहता था। वह यहाँ मूवी एडिटिंग की कोचिंग कर रहा था। परिजनों के मुताबिक, इसी दौरान गगन की मुलाकात रुद्रपुर निवासी एक युवती से हुई और दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया।
युवती ने प्रेमी से मांगी थी प्यार की परीक्षा
परिजनों ने आरोप लगाया कि शनिवार को वेलेंटाइन डे के मौके पर युवती ने गगन से प्यार की किसी तरह की परीक्षा मांगी थी। विवाद इतना बढ़ा कि गगन ने कमरे के भीतर फंदा बनाकर जान दे दी। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। सूचना पर पहुंची बिलासपुर पुलिस ने शव को फंदे से उतारा। इस संबंध में थाना प्रभारी जीत सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन परिजनों के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस युवक के मोबाइल की कॉल डिटेल और मैसेज खंगाल रही है, ताकि मौत की असली वजह का पता चल सके।
मौके पर मिले फूल,चॉकलेट और परफ्यूम
प्रेमी से कहासुनी के बाद फंदे पर झूलने से हुई प्रेमी की मौत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने युवक के पास से एक फूल,एक चॉकलेट,परफ्यूम को बरामद किया है।
आईआईटी में लैब टेक्नीशियन ने लगाई फांसी
वहीं दूसरी ओर कानपुर में वेलेंटाइन डे के दिन युवती द्वारा फांसी लगाने का मामला सामने आया है।झारखंड के जादूगोड़ा (पूर्व सिंहभूमि) निवासी राजनंदन रविदास की 26 वर्षीय बेटी अंजू पिछले तीन वर्षों से आईआईटी में जूनियर लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थी। कैंपस कर्मियों के अनुसार, उसकी शादी उड़ीसा में पावर हाउस में तैनात प्रताप कुमार पासवान से तय हुई थी। 25 सितंबर को आईआईटी के गेस्ट हाउस में दोनों की सगाई हुई थी।
बताया जा रहा है कि वेलेंटाइन डे पर शनिवार सुबह अंजू की मंगेतर प्रताप से बातचीत के दौरान कहासुनी हो गई थी। इस पर गुस्साई अंजू ने सुसाइड करने की बात कहते हुए कॉल काट दी और पंखे के कुंडे से फांसी लगा ली। हालांकि मंगेतर ने तुरंत कैंपस में रहने वाले अंजू के दोस्त सूरज को फोन किया और अंजू के कमरे में भेजा। सूरज दौड़ते हुए अंजू के कमरे पर पहुंचा और काफी देर तक दरवाजा खटखटाता रहा। दरवाजा नहीं खुला तो सुरक्षा कर्मियों और प्रबंधन को जानकारी दी गई। आईआईटी प्रबंधन की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर कमरे में दाखिल हुई, जहां अंजू का शव फंदे से लटका मिला। एडीसीपी पश्चिम कपिल देव सिंह ने बताया कि अंजू के जुड़वा भाई ने कुछ समय पहले आत्महत्या की थी, जिसके बाद वह मानसिक तनाव में रहने की बात सामने आई है। मंगेतर से फोन पर विवाद की जानकारी भी मिली है। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।
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लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
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उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


