
102 साल बाद गोरखपुर की तंग गलियों से बाहर निकलेगा गीता प्रेस, यहां लगने जा रही नई यूनिट
गीता प्रेस का 100 साल पूरा हो चुका है। आने वाले 100 साल की कार्ययोजना के साथ गीता प्रेस का विस्तार किया जा रहा है। लोगों को उच्च गुणवत्ता की मशीनों से प्रिंट धार्मिक पुस्तकें मांग के अनुसार मिल सकें।
धार्मिक पुस्तकों के तीर्थ कहे जाने वाले गीता प्रेस का हिन्दी बाजार की तंग गलियों से निकलकर गीडा क्षेत्र में विस्तार होने जा रहा है। देश-दुनिया से होने वाली पुस्तकों की मांग को पूरा करने के लिए गीता प्रेस प्रबंधन ने गीडा से 10 एकड़ जमीन की डिमांड की है। गीडा प्रशासन भी लिंक एक्सप्रेस वे से सटे सेक्टर 27 में जमीन आवंटन को तैयार है। महीने के अंत तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। गीता प्रेस प्रबंधन 100 साल की योजना के साथ यहां यूनिट स्थापित करेगा।

वर्ष 1923 में स्थापित गीता प्रेस का 102 साल का सफर स्वर्णिम रहा है। अभी तक यहां से 15 भाषाओं में 1850 प्रकार की 100 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में सालाना 3 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं। लेकिन अत्याधुनिक प्रिंटिंग और बाइंडिंग मशीनों के बाद भी गीता प्रेस प्रबंधन देश-दुनिया की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहा है। ऐसे में 102 साल बाद गीता प्रेस हिन्दी बाजार की तंग गलियों से निकल कर अपनी यूनिट का विस्तार गीडा में करने जा रहा है।
10 करोड़ की आधुनिक मशीनों से नए प्लांट में प्रिंट होंगी पुस्तकें
गीता प्रेस फिलहाल तंग गलियों में है। जिससे पुस्तकों के परिवहन को लेकर दिक्कतें होती हैं। लिंक एक्सप्रेस से सटे सेक्टर 27 में जमीन का आवंटन होने से बड़ी मशीनें आ सकेंगी और प्रिंट होकर पुस्तकें जल्द से जल्द गतव्य स्थानों पर पहुंचाई जा सकेंगी। नई यूनिट में 10 करोड़ कीमत की अत्याधुनिक मशीनों से धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन की तैयारी है।
गीता प्रेस प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया, गीडा से 10 एकड़ जमीन की मांग की गई है। देश-दुनिया से साल दर साल बढ़ रही धार्मिक पुस्तकों की मांग को देखते हुए विस्तार जरूरी हो गया है। गीता प्रेस का 100 साल पूरा हो चुका है। आने वाले 100 साल की कार्ययोजना के साथ गीता प्रेस का विस्तार किया जा रहा है। लोगों को उच्च गुणवत्ता की मशीनों से प्रिंट धार्मिक पुस्तकें मांग के अनुसार मिल सकें, इसका प्रयास किया जा रहा है।
गीडा एसीईओ रामप्रकाश ने बताया, गीता प्रेस प्रबंधन की तरफ से 10 एकड़ जमीन की मांग की गई है। जमीन मुहैया कराने की औपचारिकता पूरी की जा रही है। गीता प्रेस जैसी प्रतिष्ठित संस्था का गीडा में विस्तार करना गर्व का विषय है।





