लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर दूसरे दिन ही हादसा, रोक के बाद भी दो युवकों ने दौड़ाई बाइक, दोनों की मौत

सरोजनीनगर (लखनऊ) संवाददाता
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक शुरू होने के दूसरे ही दिन बड़ा हादसा हुआ है। एक्सप्रेसवे पर बाइक से पहुंचे दो युवकी की हादसे में मौत हो गई है। पुलिस हादसे का कारण जानने की कोशिश में जुटी है।

Lucknow-Kanpur Expressway

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे चालू होने के दूसरे दिन ही बड़ा हादसा हुआ है। एक्सप्रेसवे पर बाइक का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद भी बुधवार शाम बंथरा थाना क्षेत्र में नियम तोड़कर बाइक से जा रहे दो युवकों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और वाहन की तलाश में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

इस एक्सप्रेसवे पर दोपहिया, तिपहिया और धीमी गति के वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद लोग शॉर्टकट के चक्कर में दरोगा खेड़ा और आसपास के रास्तों से बाइक लेकर एक्सप्रेसवे पर चढ़ जा रहे हैं।बंथरा इंस्पेक्टर राणा राजेश सिंह ने बताया कि उन्नाव जिले के सोहरामऊ थाना क्षेत्र के अर्जुनामऊ निवासी हिमांशु सिंह उम्र 25 वर्ष अपने साथी हरदोई के संडीला निवासी शैलेंद्र सिंह उम्र 24 वर्ष के साथ बुधवार शाम करीब 6 बजे लखनऊ से बाइक द्वारा घर लौट रहे थे। दोनों लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ऊपर बंथरा कस्बे में किलोमीटर 20.5 के पास पहुंचे थे, तभी पीछे से आए तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।

एक की मौके पर मौत, दूसरे ने अस्पताल में तोड़ा दम

टक्कर के बाद दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची बंथरा पुलिस और एनएचएआई की टीम ने दोनों को तत्काल सरोजनीनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने हिमांशु सिंह को मृत घोषित कर दिया। वहीं शैलेंद्र सिंह की हालत नाजुक होने पर उसे केजीएमयू ट्रामा सेंटर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।

हेलमेट नहीं था, सीसीटीवी से हो रही पहचान

पुलिस के मुताबिक हादसे के समय दोनों युवकों ने हेलमेट नहीं पहना था। अज्ञात वाहन चालक टक्कर मारकर मौके से फरार हो गया। पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर वाहन की पहचान की जा रही है। टोल प्लाजा के रिकॉर्ड भी चेक किए जा रहे हैं। परिजनों को सूचना दे दी गई है।

सेंसर रह-रह कर बंद, चार स्थानों पर अटके वाहन

एक्सप्रेस वे से कानपुर का सफर सुगम तो हो गया है लेकिन चंद स्थानों पर थोड़ी दिक्कतें आ रहीं हैं। नए एक्सप्रेस वे से सफर करने वालों की इस बात की तस्दीक गूगल मैप भी कर रहा है। उन्नाव एग्जिट, अमौसी में एंट्री प्वाइंट और आजाद चौक के पास एक्सप्रेस वे पर लम्बे ऑरेन्ज पैच नजर आए। शाम तक एक्सप्रेस वे एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर पैच लाल भी दिखाई देने लगे। वहीं उन्नाव में लगातार दूसरे दिन और आजाद चौक में बुधवार को नंबर और फास्टैग रीड करने वाले सेंसर रह-रह कर बंद होते रहे, जिसके चलते भी वाहनों को कुछ वक्त के लिए रुकना पड़ रहा था, जिससे टोल पर वाहनों की लाइन लगी।

ऑटोमैटिक सिस्टम से रफ्तार धीमी

उन्नाव एग्जिट पर गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो जा रही है। चूंकि पहली बार इस एक्सप्रेस-वे पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक और बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम लगाया गया है, इसलिए शुरुआती दिनों में गाड़ियों को पास कराने और तकनीकी जांच के चलते वाहनों की मामूली कतारें देखी जा रही हैं। इसी तरह अमौसी (लखनऊ एंट्री पॉइंट) और आजाद चौराहा (कानपुर एग्जिट), इन दोनों छोरों पर एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने और उतरने वाली गाड़ियों की सामान्य से थोड़ी ज्यादा संख्या होने से यातायात धीमा रहा।

टोल सूचना न होने पर जाम

सरोजनीनगर। एक्सप्रेस-वे के संचालन के दूसरे दिन दरोगाखेड़ा एंट्री प्वाइंट पर कई बार जाम लगा। प्रवेश स्थल पर टोल बूथ और टोल दरों की स्पष्ट जानकारी न होने से कई वाहन चालक अनजाने में एक्सप्रेस-वे पर चढ़ गए। शिवपुरा निकास पर 115 से 143 रुपये टोल की जानकारी मिलने पर अधिकांश चालक वापस लौटने लगे, जिससे दोनों ओर से वाहनों का दबाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बनी-मोहनलालगंज और आसपास की ओर जाने वाले वाहन भी भ्रमवश एक्सप्रेस-वे पर पहुंच जाते हैं। टोल संबंधी सूचना बोर्ड न होने से यह समस्या लगातार बनी हुई है।

टोल सूचना बोर्ड पर यात्रा शुल्क दर्ज नहीं

वाहन चालकों को टोल शुल्क की जानकारी देने के लिए टोल प्लाजा पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों में विभिन्न श्रेणी के वाहनों का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन उनके सामने यात्रा शुल्क (टोल दर) का कॉलम खाली है। ऐसे में मौके पर पहुंचने वाले वाहन चालकों को यह पता नहीं चल पाता कि उन्हें कितनी टोल राशि का भुगतान करना होगा।

गंगा एक्सप्रेस वे से जुड़ाव

उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेस-वे और कानपुर एक्सप्रेस-वे का इंटरचेंज हो रहा है। इस जंक्शन के निर्माण कार्य, लूप्स की डिजाइनिंग और भारी क्रेन/मशीनरी के चलते इस पूरे पैच में ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है। यही कारण मैप पर लंबा ऑरेंज पैच दिखाई दे रहा।

मर्जिंग ट्रैफिक

उन्नाव यूपी का एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब है। दही चौकी और इसके आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों से भारी ट्रक और डंपर जब अचानक एक्सप्रेस-वे की कनेक्टिंग लेन या पुराने हाईवे पर आते हैं, तो बॉटलनेक बन जाता और जाम होता।

बिना टोल दिए लॉन्ग ड्राइव

लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे के दरोगाखेड़ा एंट्री प्वाइंट से प्रवेश करने वाले कुछ वाहन चालक बिना टोल चुकाए लॉन्ग ड्राइव का आनंद ले रहे हैं। कारण यह है कि यहां फिलहाल न टोल बूथ है और न ही फास्टैग स्कैनिंग की व्यवस्था। स्थानीय लोगों के अनुसार कई चालक केवल एक्सप्रेस-वे का अनुभव लेने के लिए प्रवेश करते हैं और उन्नाव से पहले बने इमरजेंसी कट से यू-टर्न लेकर वापस लौट जाते हैं।

प्रवेश के समय फास्टैग स्कैन न होने और सेंसर की सीमा तक वाहन न पहुंचने के कारण उनसे टोल शुल्क नहीं कटता। वहीं कानपुर से लखनऊ आने वाले वाहनों का फास्टैग लगभग 20.5 किलोमीटर पर लगे सेंसर से स्वतः स्कैन हो जाता है। दरोगाखेड़ा स्थित एडमिन ब्लॉक के अधिकारियों ने भी माना कि एंट्री प्वाइंट पर फास्टैग स्कैनिंग न होने की वजह से ऐसे वाहनों से टोल वसूली संभव नहीं हो पा रही है।

गूगल पर ऑरेंज और यलो पैच

एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियों की अधिकतम गति सीमा 100 से 120 किमी/घंटा है। ऑरेंज या यलो पैच का मतलब यह है कि वहां गाड़ियों की औसत रफ्तार घट कर 45 से 65 किमी प्रति घंटा आ गई है। गूगल वाहन चालकों के जेब में रखे स्मार्ट मोबाइल जिनका जीपीएस चालू हो, उनसे मदद लेता है। यदि औसत रफ्तार से किसी जगह गति धीमी हुई है तो उस स्थान को यलो या ऑरेन्ज पैच में बदल देता है।

इस तरह बताता है मैप्स

गूगल, मैप्स माई इंडिया या अन्य सेवा प्रदाता सामान्य रफ्तार से तुलना कर निष्कर्ष निकालता है। ग्रीन का अर्थ है कि जब गाड़ियां अपनी सामान्य गति के 85% से 100% की रफ्तार पर चल रही हों। ऑरेंज/येलो यानी कि जब गाड़ियों की रफ्तार घटकर सामान्य तय गति की 45% से 65% के बीच रह जाए। रेड का अर्थ है कि वाहनों के बेहद धीमी गति से रेंगना।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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