मथुरा में हादसा: पैंटून पुल से टकराकर यमुना नदी में पलटी नाव, लुधियाना से आए 30 लोग डूबे, 10 की मौत

Apr 10, 2026 06:36 pm ISTDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, मथुरा
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मथुरा में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। लुधियाना से वृंदावन घूमने आए 30 श्रद्धालुओं से भरी नाव यमुना नदी में पलट गई। जिससे सभी लोग नदी के पानी में डूब गए। गोताखोरों ने दस लोगों के शव बरामद किए हैं। अभी रेस्क्यू जारी है।

Mathura News: यूपी के मथुरा में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। लुधियाना से वृंदावन घूमने आए 30 श्रद्धालुओं से भरी नाव यमुना नदी में पलट गई। जिससे सभी श्रद्धालु नदी में डूब गए। श्रद्धालुओं की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग बचाने के लिए दौड़े। पुलिस और गोताखोर भी मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में राहत बचाव कार्य शुरू कराया गया। अभी तक 10 लोगों के शवों को बरामद किया जा चुका है। जबकि 15 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। पांच लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए रात बचाव कार्य जारी है।

शुक्रवार को पंजाब के लुधियाना से 30 श्रद्धालुओं का ग्रुप वृंदावन घूमने आया था। सभी श्रद्धालु यमुना नदी के भ्रमण के लिए नाव पर सवार हो गए। आम दिनों के मुकाबले शुक्रवार को हवा काफी तेज चल रही थी। बताते हैं कि करीब पौने तीन बजे हवा के चलते नाव का संतुलन बिगड़ गए। जिससे नाव पैंटून पुल से टकरा गई और यमुना नदी में पलट गई। नाव में सवार सभी श्रद्धालु भी यमुना नदी में गिर गए। पानी में गिरते ही श्रद्धालुओं ने चीख-पुकार शुरू कर दी। नदी में श्रद्धालुओं के डूबने की खबर से आसपास के लोग उन्हें बचाने के दौड़े।

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मृतकों की सूची

मरने वालों में छह महिला और चार पुरुष शामिल हैं। इनमें आशा रानी पत्नी अर्जुन मिड्डा मिवासी भिवाड़ी हरियाणा, पिंकी पत्नी चरणजीत, कविता पत्नी विजय कुमार, मीनू, अंजू पत्नी राकेश गुलाटी, चरणजीत, रिकेश गुलाटी, मधुर बहल, इसान कटारिया, सपना निवासी जगराव पंजाब शामिल हैं।

राहत-बचाव कार्य जारी

पुलिस और गोताखोरों ने भी आनन-फानन में राहत बचाव कार्य शुरू कर दिया। तब तक सभी लोग गहरे पानी में समा चुके थे। हालांकि गोताखोरों ने 15 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन 10 लोगों की मौत हो गई। बाकी पांच लोगों की भी तलाश के लिए गोताखोरों का राहत बचाव अभियान जारी रहा। 10 लोगों की मौत से परिवार में चीख-पुकार मच गई। एसडीएम ऋतु सिरोही ने हादसे की वजह ओवरलोड बताया। उन्होंने कहा, नाव पर जरूरत से ज्यादा लोग सवार थे। अब तक 10 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। यमुना में गोताखोर टीम लापता लोगों की तलाश कर रही है।

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अफसर

हादसे के बाद मौके पर पुलिस और प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे। डीएम, एसएसपी और डीआईजी ने मौके का जायजा लिया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया स्थानीय गोताखोरों की मदद से राहत कार्य जारी है। एनडीआरएफ और सेना को भी बुलाया गया है। अस्पतालों को भी अलर्ट कर दिया गया है। सभी घायलों का मुफ्त में इलाज कराया जाएगा।

सीएम योगी ने लिया हादसे का संज्ञान

मथुरा में हुए हादसे का सीएम योगी ने भी संज्ञान लिया है। सीएम योगी ने हादसे का दुख जताते हुए सभी अफसरों को आनन-फानन में मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने कहा, घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर उनका इलाज शुरू कराया जाए।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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