यूपी में परिषदीय स्कूलों का आ गया शैक्षिक कैलेंडर, जानें कब से होगी गर्मी और सर्दी की छुट्टी

Dinesh Rathour लखनऊ, प्रमुख संवाददाता
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यूपी में परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का शैक्षिक सत्र 2026-27 का शैक्षिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है। इस कैलेंडर में गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के अलावा स्कूल खुलने और बंद होने का समय भी बताया गया है।

यूपी में परिषदीय स्कूलों का आ गया शैक्षिक कैलेंडर, जानें कब से होगी गर्मी और सर्दी की छुट्टी

UP School News: यूपी में परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का शैक्षिक सत्र 2026-27 का शैक्षिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है। इस कैलेंडर में गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के अलावा स्कूल खुलने और बंद होने का समय भी बताया गया है। उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्रों को तनाव से बचाने के लिए काउंसिलिंग सत्र चलाए जाएंगे। अर्द्धवार्षिक परीक्षा तक 50 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले कमजोर छात्रों को चिह्नित कर उनकी विशेष पढ़ाई कराई जाएगी।

नए सत्र में नया सवेरा कार्यक्रम का आयोजन इसी महीने से ही शुरू होगा। जिसमें हफ्ते में दो दिन शिक्षाधिकारी स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में अनिवार्य रूप से जाएंगे। वह जीवन मूल्यों, अनुशासन और नियमित दिनचर्या सहित विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर प्रेरक संवाद करेंगे। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों और पुरातन छात्रों को भी आमंत्रित किया जाएगा। उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्रों के मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। जिसमें परीक्षा तनाव, किशोरावस्था समस्याओं व आत्मविश्वास विकास पर चर्चा की जाएगी।

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छात्रों का स्क्रीन टाइम कम करने व मोबाइल के अत्याधिक प्रयोग की आदत को कम करने के लिए पठन संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रार्थना सभाओं में अनिवार्य रूप से समाचार पत्र पढ़े जाएंगे। वहीं स्कूलों में पुस्तकालय की पुस्तकें पढ़ने को दी जाएंगी। विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि किस तरह मोबाइल व टीवी के अत्याधिक प्रयोग से आंख की रोशनी पर प्रभाव, पढ़ाई की एकाग्रता में कमी और ऑनलाइन गेम की लत के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति पर दिया जाएगा जोर

सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम का मासिक विभाजन किया गया है। मई तक 20 प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा कराना अनिवार्य होगा और फरवरी 2027 तक शत-प्रतिशत पाठ्यक्रम पूरा कराना अनिवार्य होगा। विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति पर जोर दिया जाएगा। हर महीने विशेष दिवस व महापुरुषों की जयंती इत्यादि मनाई जाएंगी। कक्षा 6 से कक्षा 8 तक शिक्षक प्रत्येक कक्षा में अंतिम 10 मिनट इनफॉर्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) संसाधनों का प्रयोग करेंगे। छात्रों को परीक्षा परिणाम का समग्र प्रगति पत्र दिया जाएगा। जिसमें उनके व्यक्तित्व का संपूर्ण मूल्यांकन होगा।

स्कूलों का समय व अवकाश

एक अप्रैल से 30 सितंबर तक विद्यालयों का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और एक अक्तूबर से 31 मार्च तक सुबह 9 बजे से अपराह्न 3 बजे तक चलेंगे। शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक और ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 मई से 15 जून तक होगा।

शनिवार को लगेगी मस्ती की पाठशाला

परिषदीय स्कूलों में हर शनिवार को बैगलेस डे होगा। अंतिम शनिवार को बाल मनोविज्ञान पर आधारित शैक्षिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मनोदर्पण पोर्टल पर शिक्षकों को इसकी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं बच्चों को सिखाया जाएगा कि वह किस तरह अपनी शिकायत लिखकर शिकायत पेटिका में डालें।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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