अब और नहीं झेल सकती…पीजी की तैयारी कर रही डॉक्टर ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट छोड़ा
इटावा में नीट पीजी की तैयार कर रही एमबीबीएस डॉक्टर ने फांसी लगाकर जान दी। डॉक्टर ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। घर के आंगन में डॉक्टर का शव मिलने से कोहराम मच गया।

Etawa News: इटावा जिले की फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र के अर्जुन नगर में एमबीबीएस पास कर नीट पीजी की तैयारी कर रही डॉक्टर ने फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें छात्रा ने अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए लिखा कि मैं अब और नहीं झेल सकती... मेरी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। इसके अलावा पुलिस को महिला डॉक्टर के टैबलेट में रिकॉर्ड किए गए दो वीडियो संदेश भी मिले हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस ने बताया कि 27 वर्षीय सौम्या दीक्षित व्यवसायी रविकांत दीक्षित की पुत्री थी। उसने कानपुर के रामा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और वर्ष 2024-25 से पीजी नीट की तैयारी कर रही थी। परिजनों के अनुसार वह लंबे समय से पढ़ाई और भविष्य को लेकर तनाव में थी। घटना के समय घर में सौम्या अकेली थी। मां कामिनी अपने इंजीनियर बेटे शिवम दीक्षित के पास बेंगलूरू गई थीं, जबकि पिता रविकांत दीक्षित अपने कोल्ड स्टोरेज के काम से बाहर थे। परिवार का जसवंतनगर क्षेत्र में ईंट-भट्ठा और कोल्ड स्टोरेज का व्यवसाय है।
आंगन में फंदे पर लटका मिला शव
गुरुवार शाम रविकांत जब घर लौटे तो काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अनहोनी की आशंका पर उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया। लोगों की मदद से वे घर के भीतर पहुंचे। आंगन में सौम्या का शव फंदे से लटक रहा था। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अमित मिश्रा पुलिस बल और फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच के बाद पुलिस और परिजनों ने टैबलेट व लैपटॉप की जांच की। इसमें दो वीडियो संदेश मिले। मृतका के मामा अधिवक्ता पल्लव दुबे ने बताया एक वीडियो 26 मई का है। इसमें सौम्या ने पहले भी आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश करने का जिक्र किया है, जबकि दूसरा वीडियो गुरुवार का है, जिसे उसने घटना से ठीक पहले रिकॉर्ड किया था। पुलिस इन वीडियो की तकनीकी जांच करा रही है।
सुसाइड नोट में क्या-क्या लिखा
वहीं एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें सौम्या ने लिखा है कि वह मैं अब डिप्रेशन, एंजाइटी और डिस्पेयर और नहीं झेल सकती। मेरी मौत के लिए परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदार न ठहराया जाए। साथ ही माता-पिता, भाई और अन्य परिचितों से माफी मांगते हुए सभी के प्रति अपना प्रेम और आभार व्यक्त किया। थाना प्रभारी अमित मिश्रा ने बताया कि तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया है, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है। घटनास्थल से मिले मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप को तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


