कुदरत का करिश्मा: डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, घर पर फ्रिजर में रखने के बाद हो गया जिंदा
मृत घोषित व्यक्ति के घर में रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों का तांता लगा था, तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। करीब आधे घंटे बाद परिजनों ने देखा कि 'शव' के हाथ-पैर में हलचल हो रही है।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसी हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। कोई इसे कुदरत का करिश्मा बोल रहा है तो कोई डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही कह रहे हैं। गुरसहायगंज कस्बे में एक व्यक्ति को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। लोग शव घर लाए और फ्रीजर में रखकर रिश्तेदारों का इंतजार करने लगे तो अचानक मृत घोषित व्यक्ति जिंदा हो गया। इस 'चमत्कार' को देखकर जहां परिजनों की आंखों से बहते आंसू खुशी में बदल गए, वहीं इलाके में यह घटना चर्चा का केंद्र बन गई है।
मामला गुरसहायगंज कस्बे के तिर्वा रोड स्थित एक दुकानदार से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, बीती 31 दिसंबर की शाम वह अपने घर लौटे थे और बाहर जल रहे अलाव के पास बैठे थे। तभी अचानक उन्हें दिल का दौरा या कोई अन्य गंभीर समस्या हुई और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें आनन-फानन में स्थानीय निजी अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर हालत देखते हुए कानपुर रेफर कर दिया गया। कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहे।
डॉक्टरों की 'मौत' की पुष्टि और मातम
परिजनों का कहना है कि 2 जनवरी की शाम करीब 6 बजे अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया और शव ले जाने को कह दिया। घर में मौत की खबर पहुंचते ही कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन 'शव' को लेकर गुरसहायगंज पहुंचे। चूंकि रात काफी हो चुकी थी और अंतिम संस्कार सुबह होना था, इसलिए शव को सुरक्षित रखने के लिए नगर पालिका से विशेष डीप फ्रीजर मंगवाया गया। परिजनों ने भारी मन से अपने प्रियजन को उस फ्रीजर में लिटा दिया।
चमत्कार देख फटी रह गईं आंखें
घर में रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों का तांता लगा था, तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। करीब आधे घंटे बाद परिजनों ने देखा कि 'शव' के हाथ-पैर में हल्की हलचल हो रही है। पहले तो लोगों को भ्रम लगा, लेकिन जब शरीर में कंपन बढ़ा और सांसें चलने के स्पष्ट संकेत मिले तो अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत उन्हें बाहर निकाला। शरीर में गर्माहट और पल्स देखकर हर कोई दंग रह गया।
दोबारा कानपुर रवाना
बिना एक पल की देरी किए परिजन उन्हें उसी हाल में लेकर दोबारा कानपुर के अस्पताल की ओर दौड़े। इसके बाद उन्हें भर्ती कराया गया। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। उनकी स्थिति अभी भी नाजुक लेकिन स्थिर बनी हुई है। इस घटना ने एक ओर जहां भगवान के प्रति लोगों की आस्था को बढ़ाया है, वहीं कानपुर के उस अस्पताल के खिलाफ लोगों का गुस्सा भी बढ़ा दिया है, जिसने बिना गहन जांच के मरीज को मृत घोषित कर दिया था। यदि परिजन तुरंत फ्रीजर न मंगवाते या कुछ और देर हो जाती, तो शायद एक जीवित व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर दिया जाता। फिलहाल, पूरा इलाका उनके पूरी तरह ठीक होकर लौटने की प्रार्थना कर रहा है।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


