
पैमाइश का खेल; गलत को सही करने के लिए मांगा डेढ़ लाख, ऑडियो वायरल होते ही सस्पेंड
यूपी के अलीगढ़ में पैमाइश के नाम पर होने वाला खेल उजागर हुआ है। लेखपाल ने गलत पैमाइश को सही करने के लिए एक लाख रुपए ले लिये। इससे संतोष नहीं हुआ तो 50 हजार और मांगे। किसान ने लेखपाल की बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया।
यूूपी में अलीगढ़ में पैमाइश का खेल उजागर हुआ है। यहां की तहसील गभाना में एक किसान की जमीन का पहले गलत पैमाइश किया गया। फिर उसे सही करने के लिए एक लाख रुपए रिश्वत ली गई। इसके बाद भी और 50 हजार मांगा जा रहा था। रिश्वत बरौली के हल्का लेखपाल भानुप्रताप मांग रहा था। किसान ने उसका वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया। सोशल मीडिया पर वीडियो ऑडियो वायरल होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

बरौली निवासी किसान मनोज सिंह ने हाल ही में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) प्रशासन पंकज कुमार से शिकायत की थी कि हल्का लेखपाल भानुप्रताप ने उनकी निजी कृषि भूमि की पैमाइश जानबूझकर ग़लत कर दी है। किसान ने आरोप लगाया कि उनकी क़रीब चार सौ वर्ग गज ज़मीन को बगल में स्थित पुलिस चौकी की भूमि में मिला दिया गया। जब किसान ने इस ग़लत पैमाइश को ठीक करने के लिए लेखपाल से संपर्क किया, तो पहले तो लेखपाल ने सही पैमाइश करने से मना कर दिया। फिर रुपए मांगने लगा।
पहले लिए एक लाख, फिर मांगे 50 हजार और
शिकायत में मनोज सिंह ने बताया कि ग़लत पैमाइश को सही करने के लिए लेखपाल भानुप्रताप ने उनसे एक लाख रुपए की रिश्वत ली। इसके बावजूद जब सही पैमाइश नहीं हुई तो लेखपाल ने किसान से पचास हजार रुपए और देने की मांग की। किसान ने जब रिश्वत मांगते लेखपाल से हुई बातचीत के कुछ ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो हड़कंप मच गया। रिश्वतखोरी और मनमानी की इस घटना ने पूरे तहसील प्रशासन को सवालों के घेरे में ला दिया।
ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने तत्काल एसडीएम गभाना हरिश्चंद को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत और त्वरित जांच के निर्देश दिए। एसडीएम गभाना ने बताया कि तहसीलदार द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में लेखपाल भानुप्रताप सिंह प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए हैं। भ्रष्टाचार के इस गंभीर आरोप की पुष्टि होते ही लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
एसडीएम ने आगे बताया कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इसका जिम्मा नायब तहसीलदार रतन कुमार को सौंपा गया है। यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि सरकारी कामकाज में किसी भी तरह की धांधली और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने किसान को आश्वासन दिया है कि उनकी ज़मीन की सही पैमाइश सुनिश्चित की जाएगी और दोषी लेखपाल के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने वराजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और पैमाइश के खेल को उजागर भी कर दिया है। अगर लेखपाल एक लाख में ही संतोष कर लेता तो मामला उजागर ही नहीं होता। अब किसानों ने लेखपाल के पिछले कारनामों की जांच के साथ ही अन्य लेखपालों की भी जांच की मांग मुखर करने की तैयारी कर ली है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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