
आपसी सहमति से बना संबंध धोखाधड़ी नहीं, शादी टूटने पर दर्ज नहीं हो सकता आपराधिक केस: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से बने संबंधों और कानून की व्याख्या को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर टूटता हुआ रिश्ता धोखाधड़ी नहीं होता और कानून का इस्तेमाल किसी को केवल इसलिए दंडित करने के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि संबंध शादी के मुकाम तक नहीं पहुंच सका।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई करते हुए कानून की लक्ष्मण रेखा स्पष्ट कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से लंबे समय तक चले संबंधों को बाद में 'धोखाधड़ी' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ किया कि धारा 69 केवल उन मामलों में लागू होती है जहाँ मंशा शुरू से ही छल या धोखे की हो, न कि उन मामलों में जहाँ परिस्थितिवश शादी नहीं हो पाई।
क्या है पूरा मामला?
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने नीलेश राम चंद्रानी नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला और याची नीलेश की मुलाकात एलएलएम (LLM) की पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों साल 2020 से एक-दूसरे से परिचित थे और प्रेम संबंध में थे। उनके बीच जून 2023 में औपचारिक रूप से सगाई भी हुई थी और नवंबर 2024 में शादी की तारीख तय हो चुकी थी। शादी की तैयारियों के तहत होटल की बुकिंग, कार्ड की छपाई और फोटोग्राफर तक तय किए जा चुके थे।
हालांकि, बाद में किन्हीं कारणों से शादी टूट गई, जिसके बाद महिला ने नोएडा के सेक्टर 63 थाने में नीलेश के खिलाफ धारा 352 (शांति भंग), 351(2) (धमकी), और मुख्य रूप से धारा 69 (शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध) के तहत एफआईआर दर्ज करा दी।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि इस केस में 'शादी का वादा' शुरू से ही झूठा नहीं था। सगाई होना और शादी के लिए होटल बुकिंग करना यह साबित करता है कि याची का इरादा शादी करने का था।
धारा 69 की व्याख्या
कोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 69 केवल उस छल को दंडित करती है जहां आरोपी का इरादा शुरू से ही यौन संबंध बनाने के लिए झूठा वादा करने का हो।
सहमति और निराशा
खंडपीठ ने कहा कि आपसी सहमति से बने रिश्तों के टूटने से उत्पन्न 'निराशा' को 'धोखा' नहीं कहा जा सकता। अगर दो बालिग लंबे समय तक रिश्ते में रहे हैं तो उसे बाद में आपराधिक मामला बनाना कानून का दुरुपयोग है।
एफआईआर आंशिक रूप से रद्द, गिरफ्तारी पर रोक
अदालत ने शादी के झूठे वादे (धारा 69) से जुड़े आरोपों की एफआईआर को रद्द कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए मारपीट और धमकी से जुड़े अन्य आरोपों की जांच जारी रहेगी। इसके साथ ही, अदालत ने आदेश दिया कि चार्जशीट दाखिल होने तक याची (नीलेश) की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
यह फैसला उन मामलों में एक नजीर साबित हो सकता है जहां आपसी सहमति से बने संबंधों के टूटने के बाद अक्सर 'शादी के झूठे वादे' का सहारा लेकर आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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