शादी का वादा करके सहमति से संबंध को नहीं माना जा सकता रेप, हाईकोर्ट ने रद्द किया समन आदेश

प्रयागराज, विधि संवाददाता
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हाईकोर्ट ने कहा कि झूठे विवाह वादे और विवाह का बाद में टूट जाना दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। दुष्कर्म का अपराध तभी बनेगा जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही विवाह करने का कोई इरादा नहीं रखा था और केवल शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से झूठा वादा किया गया था।

शादी का वादा करके सहमति से संबंध को नहीं माना जा सकता रेप, हाईकोर्ट ने रद्द किया समन आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल विवाह का वादा कर लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को हर मामले में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शुरू से ही धोखा देने की मंशा साबित न हो तो बाद में विवाह से इनकार करना झूठे विवाह वादे पर दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आएगा। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने यह फैसला कपिल सोम और एक अन्य की ओर से दाखिल आपराधिक अपील पर सुनाया। कोर्ट ने मुरादाबाद की विशेष एससी/एसटी अदालत द्वारा पारित संज्ञान और समन आदेश को रद्द करते हुए पूरे मुकदमे की कार्यवाही ही निरस्त कर दी।

मामले में महिला ने आरोप लगाया था कि इंस्टाग्राम पर संपर्क के बाद आरोपी कपिल सोम ने विवाह का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी और उसके परिवार ने उससे मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी तथा आर्थिक शोषण किया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के पिता ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। इस आधार पर वर्ष 2025 में एससी/एसटी एक्ट तथा बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि झूठे विवाह वादे और विवाह का बाद में टूट जाना दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। अदालत ने कहा कि दुष्कर्म का अपराध तभी बनेगा जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही विवाह करने का कोई इरादा नहीं रखा था और केवल शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से झूठा वादा किया गया था।

कोर्ट ने पाया कि महिला 24 वर्ष की बालिग और शिक्षित थी। वह अपनी इच्छा से आरोपी के संपर्क में आई, उसके साथ मेरठ गई और लंबे समय तक उसके साथ पति-पत्नी की तरह रही। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से संबंध सहमति आधारित प्रतीत होते हैं और प्रथम दृष्टया यह नहीं दिखता कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने की थी।

अदालत ने यह भी कहा कि लंबे समय तक बिना विरोध जारी रहे संबंधों में बाद में आपराधिक आरोप लगाने से प्रत्येक असफल प्रेम संबंध को आपराधिक मुकदमे में बदला जा सकता है, जिससे न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर असफल संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि बीएनएस की धारा 69 इस मामले में लागू नहीं हो सकती, क्योंकि कथित घटनाएं वर्ष 2022-23 की थीं, जबकि भारतीय न्याय संहिता 1 जुलाई 2024 से लागू हुई। कानून का पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं हो सकता।

एससी/एसटी एक्ट के आरोपों पर अदालत ने कहा कि एफआईआर और बयान में सार्वजनिक रूप से जातिसूचक अपमान या अपमानित करने के स्पष्ट आरोप नहीं हैं। केवल जाति का उल्लेख कर विवाह से इनकार करना एससी/एसटी एक्ट की धाराओं को आकर्षित नहीं करता।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसके साथ ही अदालत ने 5 जुलाई 2025 के समन आदेश और संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

Yogesh Yadav

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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