
बनारस में एक करोड़ के कर्ज में डूबा कारोबारी गंगा में कूदा, घर के दराज में मिला सुसाइड नोट
वाराणसी में एक करोड़ के कर्ज में डूबे इलेक्ट्रानिक सामानों के कारोबारी ने गंगा में कूद कर जान दे दी है। उनके घर की दराज से सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें एक अन्य कारोबारी का नाम लिखा है। पुलिस सुसाइड नोट के आधार पर जांच में जुटी है।
दशाश्वमेध घाट पर मंगलवार दोपहर 67 वर्षीय कारोबारी सुरेन्द्र केसरी उर्फ मुन्ना ने गंगा में कूदकर जान दे दी। देर रात गोताखोरों ने मणिकर्णिका घाट से शव निकाला। बुधवार सुबह शव लेकर परिजन पुलिस के पास पहुंचे। सुसाइड नोट में एक व्यापारी पर निवेश के नाम पर रुपये हड़पने का आरोप लगाया गया है। पुलिस की आरंभिक जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र केसरी ने लोन एवं दूसरों से कर्ज लेकर करीब 1 करोड़ रुपये लगाए, जो डूब गए।
बड़ादेव (दशाश्वमेध) के निवासी सुरेंद्र केसरी की मोहल्ले में ही इलेक्ट्रॉनिक सामानों की दुकान है। उन्हें तीन बेटियां और एक बेटा है। सभी की शादी हो चुकी है। मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे दुकान के कर्मचारी के साथ घर से बिना बताए निकले। दशाश्वमेध घाट पर पहुंचे। कर्मचारी को नाश्ता करने के लिए भेजा, इसके बाद गंगा में कूद गए। कर्मचारी लौटा तो कहीं पता नहीं चला। लोगों ने बताया कि वह गंगा में कूद गए।
इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना देने के साथ ही उनकी तलाश शुरू की। देर रात मणिकर्णिका घाट के पास एनडीआरएफ के गोताखोरों ने शव निकालकर परिजनों को सौंपा। परिजन शव लेकर घर चले गए। अगले दिन बुधवार सुबह करीब नौ बजे दशाश्वमेध थाने पहुंचे।
बताया कि सुरेंद्र के कमरे की दराज से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लोन और कर्ज लेकर एक कारोबारी के कहने पर निवेश की बात लिखी है। इस बात का भी जिक्र था कि रुपये डूबने से वह काफी तनाव में थे। जिनसे कर्ज लिया था वे दबाव बना रहे थे। इससे तंग आकर उन्होंने जान दे दी। दशाश्वमेध पुलिस ने सुसाइड नोट फोरेंसिक जांच के लिए भेजवाया। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया।
कोविड कॉल के पहले से निवेश
एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि सुसाइड नोट में जिस कारोबारी का नाम लिखा गया था, उसे बुलवाकर पूछताछ की गई। वह भी इलेक्ट्रॉनिक सामानों का व्यापारी है। उसने पूछताछ में बताया कि कोरोना के पहले ही सुरेंद्र केसरी से धंधे में निवेश के लिए कहा, वह तैयार हो गए। शुरू में बाजार ठीक रहने पर उन्हें मुनाफा हुआ। इसके बाद उन्होंने और पैसे निवेश किए। इस दौरान कोरोना में कारोबार पूरी तरह ठप हो गया। पूंजी डूब गई।
कोरोना के बाद जब बाजार ने रफ्तार पकड़ी, तब सुरेंद्र केसरी ने पूर्व की डूबी पूंजी वापस पाने एवं मुनाफे की आस में और निवेश किया। इसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लिया, अन्य कारोबारियों से कर्ज लिए थे। हालांकि इसके बाद भी मुनाफा नहीं हो रहा था। उनका पैसा डूबता गया।
उधर, कर्ज देने वाले लगातार तगादा करते थे। करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एसीपी ने बताया कि ज्यादातर राशि बिना लिखा पढ़ी के ही दी गई थी, जिसका साक्ष्य नहीं है। प्रकरण की छानबीन की जा रही है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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