सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद के नीचे दफन था 117 साल पुराना राज, 1909 की ईंटें बता रहीं इतिहास
सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद के नीचे 117 साल पुराना राज दफन था। ईंटों पर 1909 अंकित होने से कई सवाल उठने लगे हैं कि क्या वर्तमान मस्जिद की संरचना के नीचे या आसपास इससे कहीं पुराना निर्माण मौजूद था।

यूपी के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे से मिले पुराने निर्माण अवशेषों ने पूरे प्रकरण में एक नया तथ्य जोड़ दिया है। मलबे में ऐसी ईंटें मिली हैं, जिन पर 1909 का निर्माण वर्ष अंकित है। इन ईंटों की मौजूदगी ने मस्जिद की पुरानी संरचना और उसके निर्माण काल को लेकर कौतूहल बढ़ा दिया है।
ध्वस्तीकरण के बाद मौके पर बिखरे मलबे में मौजूद ईंटों की बनावट और उन पर दर्ज वर्ष ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। ईंटों पर 1909 अंकित होने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या वर्तमान मस्जिद की संरचना के नीचे या आसपास इससे कहीं पुराना निर्माण मौजूद था।
निर्माण अवशेषों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच जरूरी
हालांकि, केवल ईंटों पर अंकित वर्ष के आधार पर पूरी संरचना की उम्र निर्धारित करना संभव नहीं है। इसके लिए निर्माण अवशेषों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच जरूरी होगी। मलबे से सामने आए इन अवशेषों को अब प्रकरण में अहम बिंदु माना जा रहा है। खास तौर पर ईंटों की बनावट, आकार और उन पर दर्ज निर्माण वर्ष की पुष्टि किए जाने की जरूरत है। यदि जांच में इन ईंटों का संबंध मस्जिद की मूल संरचना से स्थापित होता है तो इससे उसके निर्माण इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। ध्वस्तीकरण के बाद सामने आए अवशेषों ने मामले को सिर्फ मौजूदा निर्माण तक सीमित न रखकर उसके पुराने इतिहास की ओर भी मोड़ दिया है।
शपथ पत्र दिए, मगर बयान के लिए कोर्ट नहीं पहुंचे तीन गवाह
वहीं कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण की कोर्ट में सुनवाई के दौरान का नया पहलू सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि मस्जिद पक्ष की ओर से शपथ पत्र देने वाले छह गवाहों में से तीन कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए पेश नहीं हुए। बताया गया कि तनवीर अहमद, अब्दुल रहीम और अब्दुल सत्तार को अपने बयान दर्ज कराने के लिए अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन तीनों पेश नहीं हुए। मामले में मस्जिद पक्ष की ओर से कुल छह गवाहों के शपथ पत्र रिकॉर्ड पर लगाए गए थे। इनमें उक्त तीन गवाहों के अलावा अब्दुल सलाम, विनोद कुमार शर्मा और विरेश कुमार के शपथ पत्र भी शामिल हैं। ऐसे में तीन गवाहों की गैरहाजिरी को सुनवाई की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। गवाहों के शपथ पत्र पहले से रिकॉर्ड पर होने के बावजूद अदालत में व्यक्तिगत रूप से बयान दर्ज कराने के लिए उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। माना यह भी जा रहा है कि तीन गवाहों के नहीं पहुंचने के बाद पैरवी कमजोर हुई है। वहीं, रिकॉर्ड में मौजूद अन्य तीन गवाहों के शपथ पत्र भी मामले की कार्यवाही का हिस्सा बने हैं।


