
9 गवाह, दस्तावेजी सबूत; पढ़ें 5 साल में तीसरी बार जेल पहुंचे आजम खान केस की पूरी कहानी
आजम खान ने बेटे अब्दुल्ला को कम उम्र में चुनाव मैदान में अब्दुल्ला को ऐसा उतारा कि पहले दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में सजा हुई और सोमवार दो पैनकार्ड के प्रकरण में। दो पैनकार्ड, दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों से ही बनवाए गए थे। अदालत में यह साबित भी हो गया।
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड प्रकरण में आजम और अब्दुल्ला को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह, दस्तावेजी साक्ष्य और हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाएं प्रस्तुत कीं। अदालत ने 415 पन्नों में अपना फैसला सुनाया। इस चर्चित केस की विवेचना सब इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार कटियार और ऋषिपाल सिंह ने की। विवेचना में प्रथम नंबर पर केस के वादी भाजपा नेता और शहर विधायक आकाश सक्सेना के बयान लिए गए थे। जबकि, दूसरे नंबर पर मुख्य प्रबंधक एसबीआई अजय कुमार को गवाह बनाया गया। जबकि, बचाव पक्ष की ओर से 18 गवाह और एक्सपर्ट पेश किए गए। लेकिन, इनकी गवाही अभियोजन के गवाहों और साक्ष्यों के आगे टिक नहीं सकी।
आजम खान ने बेटे अब्दुल्ला को कम उम्र में चुनाव मैदान में अब्दुल्ला को ऐसा उतारा कि पहले दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में सजा हुई और सोमवार दो पैनकार्ड के प्रकरण में। दरअसल, दो पैनकार्ड दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों से ही बनवाए गए थे। जो अदालत में साबित भी हो गया। बात 2017 की है, जब यूपी में विधानसभा उप चुनाव था। इस चुनाव में आजम ने अपने बेटे अब्दुल्ला आजम को स्वार सीट से चुनाव लड़ाया। वह भी तब जब अब्दुल्ला की उम्र कम थी, यहीं से आजम के बुरे दिन शुरू हो गए। अब्दुल्ला के नामांकन दाखिल करते ही आजम के सियासी विरोधियों ने घेराबंदी शुरू कर दी थी। नामांकन के अगले ही दिन अब्दुल्ला की जन्म तिथि पर विवाद हो गया था। सियासी विरोधी सक्रिय हुए तो एक के बाद एक झूठ की बुनियाद पर सियासत की सीढ़ी बनाने वाले आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला की परत-दर-परत खुलने लगीं। दो जन्म प्रमाणपत्र और दो पासपोर्ट के बाद दो पैन कार्ड का मुद्दा गर्माया। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। दस्तावेजी साक्ष्य थे, लिहाजा सजा हो गई।
पहले से ही माना जा रहा था सौ फीसदी होगी सजा
भाजपा नेता आकाश सक्सेना और नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने आरोप लगाया था कि आजम खान और उनकी पत्नी तजीन फात्मा ने अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो-दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए। पहला जन्म प्रमाणपत्र माता-पिता की ओर से शपथ पत्र देकर नगर पालिका परिषद रामपुर से 28 जून 2012 को बनवाया गया था, जबकि दूसरा जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से 21 जनवरी 2015 को जारी किया गया। यही दो जन्म प्रमाण पत्र आजम के लिए मुसीबत बन गए और पहले दो जन्म प्रमाण पत्र प्रकरण में आजम, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम को सजा हुई। सोमवार को दो पैनकार्ड मामले में सजा हो गई। दरअसल, ये केस पेपर एविडेंस पर था, लिहाजा हर कोई मान रहा था कि सजा निश्चित होगी।
नवेद मियां ने भी दाखिल किया था परिवाद
इसी प्रकरण में पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने भी आजम और अब्दुल्ला के खिलाफ परिवाद दायर किया था, जिसे कोर्ट ने इसी केस में मर्ज करते हुए फैसला सुनाया।
बिना अनुमति नहीं होगी जेल शिफ्ट
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट की परमीशन के बिना आजम या अब्दुल्ला आजम को रामपुर जेल से किसी और जेल में शिफ्ट न किया जाए। यदि जरूरी हो तो अदालत को प्रशासन अवगत कराए और अनुमति लेने के बाद ही विधिक कार्यवाही करे।
आजम आज दाखिल कर सकते हैं अपील
एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट से सजा सुनाए जाने के खिलाफ आजम खां और अब्दुल्ला आजम मंगलवार को अपील दाखिल कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में यह अपील दाखिल कर सकते हैं।
किसने क्या कहा?
एडीजीसी संदीप सक्सेना ने कहा कि दो पैनकार्ड के मामले में अदालत ने आजम और अब्दुल्ला दोनों को सात साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट के आदेशानुसार जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी और सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
रामपुर से भाजपा के विधायक और इस केस के वादी आकाश सक्सेना ने कहा कि हमारी सियासी नहीं सत्य और असत्य, अच्छाई की बुराई को लेकर लड़ाई है। दलितों, कमजोरों, गरीबों पर हुए जुल्म की लड़ाई है। अभी तो इसी मामले में सजा हुई है, आगे और भी कई मामले हैं, जिनमें सजा होना तय है। जिसने जो बोया है, उसे वह काटना ही पड़ेगा।
वहीं, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राकेश कुमार मौर्या ने कहा कि अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड प्रकरण में कोर्ट ने आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 420, 467, 468, 471 आईपीसी व 120 बी का दोषी माना है। दो को सात-सात साल की कैद व 50-50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
खुद कानून पढ़े हैं आजम खान, फिर भी दांवपेच फेल
आजम खां खुद कानून की पढ़ाई किए हुए हैं। उन्होंने सियासत के बीच वकील का पेशा भी चुना था। उनका चैंबर आज भी रामपुर कचहरी में है। लिहाजा, कानून की हर बारीकी को अच्छे से जानते और समझते हैं। यही वजह है कि वह अपने और अपने परिवार पर दर्ज मुकदमों में हर कानूनी दांव पेच आजमा रहे हैं। जिस पैनकार्ड के मामले में आज सजा हुई है, उसमें भी उन्होंने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी दांव खेले। रिवीजन दाखिल किया, लेकिन वक्त ने साथ नहीं दिया और वह फेल हो गए।
सजायाफ्ता होने के बाद जा चुकी है पिता-पुत्र की विधायकी
सपा के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां को पहले भी कोर्ट से सजा हो चुकी हैं। आजम खां को पहली बार भड़काऊ भाषण देने के मामले में 2022 में एमपी-एमएलए कोर्ट ने सजा सुनाई। जिस पर उनकी विधायकी छिन गई थी। हालांकि, इस केस में उन्होंने सेशन कोर्ट में अपील की और वहां से निर्दोष साबित हो गए। इसी तरह मुरादाबाद के छजलैट प्रकरण में आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को सजा सुनाई गई। इसमें अब्दुल्ला आजम की विधायकी छिनी थी। हालांकि, यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जिसमें अब्दुल्ला आजम ने खुद को नाबालिग बताया।
बिस्कुट के दो पैकेट लेकर जेल गए आजम
आजम खान जब जेल के गेट पर पहुंचे तो वहां बड़ा बेटा अदीब पहले से ही कुछ कपड़े लेकर खड़ा था। आजम से वह मिला। इसके बाद आजम बिस्कुट के दो पैकेट लेकर जेल चले गए। आजम खान ने जेल में मांगा सादा भोजनः सपा नेता आजम खां ने जेल में शाम को खाने के वक्त सादा भोजन की डिमांड की। उन्होंने कहा कि उनका परहेज चल रहा है जिसके चलते बिना मिर्च मसालों का सादा भोजन दें। सूत्रों के अनुसार आजम खान ने जेल प्रशासन से यह भी कहा है कि उनके भोजन की अच्छे से सुरक्षा व्यवस्था की जाए।





