राम मंदिर के धार्मिक काम 9 संत संभालेंगे, सचिव-प्रवक्ता भी नियुक्त होंगे; बैंक से टूट सकता है करार
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कई अहम फैसले हुए हैं। राम मंदिर के धार्मिक काम 9 संत संभालेंगे। निगरानी के लिए धार्मिक कमेटी बनाई गई है। सचिव-प्रवक्ता भी नियुक्त होंगे।

अयोध्या राम मंदिर की धार्मिक कमान अब नौ संतों के हाथों में होगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने धार्मिक व्यवस्था की निगरानी संत समाज को सौंपते हुए एक धार्मिक कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी करेंगे। इस कमेटी में अयोध्या के तीन संतों को सदस्य के तौर पर जगह दी गई है। समिति के अध्यक्ष समेत पांच सदस्य तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी हैं। तीन नए ट्रस्टियों के मनोनयन पर फैसला टल गया है। कहा गया कि इस महत्वपूर्ण काम में अभी कुछ सप्ताह का और समय लगेगा। बुधवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की हुई बहुप्रतीक्षित बैठक में अत्यधिक आवेदन के चलते सीईओ की नियुक्ति के लिए भी एक महीने का समय मांगा गया है। हालांकि एक सचिव, प्रवक्ता की नियुक्ति के प्रस्ताव पर सभी ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से मुहर लगा दी। तीर्थ क्षेत्र की अगली बैठक दो सितंबर को बुलाई गई है।
एसआईटी पर चर्चा नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संज्ञान
बैठक में चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया में अनियमितता की जांच कर रहे विशेष जांच दल की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हो सकी। बताया गया कि अंतिम रिपोर्ट अभी तक न मिल पाने के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। न्यासी मंडल के बीच सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में याचिकाओं पर सुनवाई की प्रगति व आदेशों का भी संज्ञान लिया गया।
मिथिलेशनंदनी शरण, राजकुमार दास और रामानंद धार्मिक कमेटी में
मणिराम दास छावनी में हुई बैठक में परिसर में पूजा-अर्चना की परंपरागत प्रमाणिकता और शुचिता बनाए रखने के लिए धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया है। समिति में अयोध्या के तीन संतों को स्थान दिया गया। समिति में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ, स्वामी दिनेंद्रदास, स्वामी कमलनयनदास पहले से ही तीर्थ क्षेत्र के सदस्य हैं। श्रीरामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, रामकथा कुंज के महंत स्वामी रामानंद दास और हनुमत निवास के महंत स्वामी मिथिलेशनंदिनी शरण को शामिल किया गया है। फिलहाल कृष्ण मोहन महासचिव के रूप में ट्रस्ट के नियमित कार्यों का संचालन करेंगे। मंदिर परिसर की पूजा परंपराओं, धार्मिक गतिविधियों और संतों के साथ समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।
बैंक की कार्य प्रणाली पर नाराजगी
चढ़ावा प्रकरण के बाद सतर्क तीर्थ क्षेत्र ने बैठक में भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू पर ठीक से काम न होने पर भी गंभीरता से विचार किया। न्यासियों ने एमओयू के अनुपालन में बैंक की ओर से की गई गलतियों पर चर्चा की। अनियमितताओं के सामने आने पर बैंक की प्रतिक्रिया और गंभीरता पर ट्रस्टियों ने नाराजगी व्यक्त की। ट्रस्ट की वित्त समिति को बैंक के साथ संबंधों पर मानक प्रक्रियाओं पर पुनर्विचार कर समुचित निर्णय लेने को कहा गया।
सीसीटीवी की पहुंच की समीक्षा होगी
न्यासियों ने मंदिर परिसर में सुरक्षा और चढ़ावा गिनती आदि व्यवस्थाओं की निगरानी की समीक्षा की। कैमरों की सुरक्षा अफसरों तक पहुंच, गणना कक्ष तक कैमरों की पहुंच के साथ ही सुरक्षा अफसरों तक उनका उपयोग पर संतुष्टि जताई। रिजर्व बैंक की टकसाल मिंट के साथ सोने-चांदी जांचने का काम जारी रखने पर भी सहमति दी गई।
सीईओ के लिए मांगा समय, सचिव-प्रवक्ता को मंजूरी
महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की ओर से जारी निर्णय पत्र में कहा गया कि सीईओ की नियुक्ति के लिए बड़ी संख्या में आवेदन मिले। इसके चलते चयन में अधिक समय की आवश्यकता बताते हुए सर्च कमेटी ने एक महीने का समय मांगा है। खास ये है कि विषय की गंभीरता, परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीईओ की नियुक्ति में हो रही देरी के चलते सभी न्यासियों ने एक सचिव की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। आने वाले समय में होने वाले सावन झूला मेला में श्रद्धालुओं की बड़ी आमद को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया। संवाद बनाए रखने के लिए एक प्रवक्ता की भी नियुक्ति को हरी झंडी दी गई।
आरोपों के बावजूद नहीं डिगी आस्था: ट्रस्ट
तीर्थ क्षेत्र की बैठक में चढ़ावा प्रकरण के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई परिवर्तन न होने पर भक्तों का आभार जताया है। कहा कि आरोपों के अतिरेक के बावजूद मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या में कमी नहीं आई है। करोड़ों रामभक्तों की आस्था अभी भी अडिग है। न्यासी मंडल ने इस अटूट समर्थन के लिए संत समाज, देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और अवध के समाज के प्रति आभार व्यक्त किया है।


