69000 शिक्षक भर्ती; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ऐक्शन में योगी सरकार, नई मेरिट लिस्ट बनाने की तैयारी

Yogesh Yadav लखनऊ, प्रमुख संवाददाता
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उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग नए सिरे से मूल चयन सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार करने की कवायद में जुट गया है। छह हफ्ते में इसे बनाकर सुप्रीम कोर्ट में पेश करना है।

69000 शिक्षक भर्ती; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ऐक्शन में योगी सरकार, नई मेरिट लिस्ट बनाने की तैयारी

यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सिरे से चयन सूची तैयार करने पर मंथन कर रहा है । अब आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने की तैयारी है। वहीं चयन से वंचित अभ्यर्थी याची लाभ देने की मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर मूल चयन सूची बनाने का आदेश दिए हैं। जिसके लिए सरकार को छह हफ्ते का समय दिया गया है। इसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिल गया। विभागीय अधिकारियों ने इसके अनुसार बैठक कर मंथन शुरू किया।

वहीं पिछड़ा-दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सभी आरक्षण प्रभावित याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे तो यह मामला पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। क्योंकि इस पर पहला हक उन प्रभावित अभ्यर्थियों का है जो 2020 से हाईकोर्ट में याची बनकर तथा 2023 से डबल बेंच में याची बनकर जीते और अब सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में लड़ाई लड़ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में मूल सूची तलब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची तैयार करने और अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश तब दिया, जब राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची तैयार करने के लिए 6 से 8 सप्ताह का समय देने की मांग की।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और ए.जी. मसीह की पीठ के समक्ष यूपी सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ के 13 अगस्त 2024 के दिए गए आदेश के अनुसार 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती की पूरी लिस्ट को बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 के तहत मूलचयन सूची के रूप में कोर्ट में पेश करेंगे। उन्होंने पीठ से कहा कि पूरी लिस्ट बनाने में वक्त लगेगा, इसलिए 6 से 8 हफ्ते का समय दे दिया जाए ताकि एक पारदर्शी मूल चयन सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश की जा सके।

जस्टिस दत्ता के एक सवाल के जवाब में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भाटी ने बताया कि निश्चित रूप से सरकार ऐसे आरक्षण पीड़ित उम्मीदवार, जिनके साथ अन्याय हुआ है सरकार उनको नौकरी देने के बारे में विचार करेगी।

इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि यदि आप (प्रदेश सरकार) ऐसा करते हैं तो हम आपके इस सुझाव से सहमत हैं और हम इन सभी याचिकाओं को लंबित रखते हैं।

दलील : ऐसे तो नौकरी से काफी लोग बाहर होंगे

सामान्य उम्मीदवारों के अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि 69 हजार सहायक शिक्षकों की पूरी सूची सामान्य श्रेणी के कट ऑफ 67.11, ओबीसी के कट ऑफ 66.73 जो परिणाम की कट ऑफ है, से मूल चयन सूची के रूप में बनी है तो कई लोग नौकरी से बाहर हो जाएंगे।

शिक्षकों की नियुक्तियां होते ही हुआ था आरक्षण पर विवाद

लखनऊ। यूपी में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए चार दिसंबर 2018 को विज्ञापन जारी किया गया । छह जनवरी 2019 को भर्ती परीक्षा हुई और एक जून 2020 को रिजल्ट घोषित किया गया । फिर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई । जैसे ही नियुक्ति शुरू हुई आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया और जो अभी तक शांत नहीं हुआ है।

अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों की कटऑफ 67. 11 और आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों की कटऑफ 66.73 है। विवाद को बढ़ता देख वर्ष 2022 में बेसिक शिक्षा विभाग ने संशोधन करते हुए आरक्षित श्रेणी के 6800 शिक्षकों की सूची जारी कर दी । मगर आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों ने इसे नहीं माना और वह विरोध करते रहे ।

आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों ने इससे कहीं अधिक संख्या में गड़बड़ी बताई। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में सामान्य अभ्यर्थियों के बराबर अंक पाने वाले आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी की मेरिट सूची में न रखते हुए आरक्षित श्रेणी की मेरिट सूची में रखते हुए आरक्षित श्रेणी की सीटें दे दी गई। आखिरकार मामला हाईकोर्ट गया और 13 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट ने नए सिरे से चयन सूची बनाने के आदेश दे दिए।

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लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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