पुराने मीटर बदलने का खर्च उठाएंगे उपभोक्ता? ARR में 4000 करोड़ का अतिरिक्त प्रस्ताव
पुराने मीटरों को बदल कर लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटर का दाम उपभोक्ताओं से बिजली दरों में लेने की तैयारी पावर कॉरपोरेशन कर रहा है। एआरआर प्रस्ताव में पावर कॉरपोरेशन ने 3800 से 4000 करोड़ रुपये मीटर के लिए जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।

पुराने मीटरों को बदल कर लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटर का दाम उपभोक्ताओं से बिजली दरों में लेने की तैयारी पावर कॉरपोरेशन कर रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव में पावर कॉरपोरेशन ने 3800 से 4000 करोड़ रुपये मीटर के लिए जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। मार्च 2026 तक लगने वाले मीटरों का आकलन करके यह प्रस्ताव दाखिल किया गया है। अगर नियामक आयोग यह प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है तो अगले साल की बिजली दरें बढ़ेंगी।
सूत्रों के मुताबिक, नियामक आयोग में जो प्रस्ताव पावर कॉरपोरेशन ने दाखिल किया है, उसके मुताबिक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एआरआर में 1109 करोड़ रुपये जुड़ जाएंगे। आकलन किया गया है कि पूर्वांचल में मार्च 2026 तक 39.29 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग जाएंगे। इसी तरह अन्य वितरण निगमों में भी लगाए जाने वाले मीटरों का आकलन करके मीटर का शुल्क बिजली दरों में लेने की मांग की गई है। ओपेक्स (ऑपरेशनल एक्सपेंडीचर) मॉडल के तहत प्रति स्मार्ट प्रीपेड मीटर 114.57 रुपये लेने की बात कही गई है।
उपभोक्ता परिषद ने किया प्रस्ताव का विरोध
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के इस प्रस्ताव का विरोध किया है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि भारत सरकार पहले ही कह चुकी है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का पैसा उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जाएगा, तो एआरआर में मीटर की लागत को शामिल करना गलत है। पावर कॉरपोरेशन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 10 सितंबर से अब तक लगभग 3,33,000 विद्युत उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत के नाम पर 6016 प्रति उपभोक्ता की दर से गलत वसूली की गई है। यदि भविष्य में बिजली दरों में स्मार्ट मीटर की लागत जोड़ी जाती है, तो यह उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक भार होगा, जो अनुचित होगा।
बिल का मीटर कम करने को बॉक्स से सीधे सप्लाई
उधर, पोस्टपेड मीटर के बाद अब प्रीपेड (स्मार्ट मीटर) डिजिटल मीटर लगाये जा रहे हैं लेकिन बिजली चोरी रुकने का नाम नहीं लगे रही है। बिजली निगम को लोग तरह-तरह से चूना लगाया जा रहा है। घनी आबादी तो छोड़िये वीआईपी कालोनियों में भी मीटर बाईपास का खेल चल रहा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान अंडरग्राउंड बिजली लाइन का है। बाक्स खुले और टूटे हैं जहां से सीधे कनेक्शन ले लिया है और बैकडोर से बिजली सप्लाई लेकर चलाई जा रही है। हालांकि नाम के लिए मीटर लगा लिया है। जिससे सप्लाई कम ली जा रही है। ऐसा खेल कई कालोनियों में चल रहा है। मगर बिजलिलेंस एवं निगम के अधिकारी-कर्मचारी गंभीर नहीं हैं।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
और पढ़ें


