यूपी के प्राइमरी और हॉयर प्राइमरी स्कूलों में 30 हजार शिक्षक सरप्लस, अफसरों ने तैयार की लिस्ट
उत्तर प्रदेश के प्राइमरी और हॉयर प्राइमरी स्कूलों में 30 हजार शिक्षक सरप्लस पाए गए हैं। इन शिक्षकों की लिस्ट तैयार कर ली गई है। लिस्ट सोशल मीडिया में वायरल भी हो रही है। इसी लिस्ट के आधार पर जिले के अंदर शिक्षकों का समायोजन किया जाना है। उधर, इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में 20 जुलाई को सुनवाई होनी है।

Surplus teachers in Basic Education Council schools : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में तकरीबन 30 हजार शिक्षक सरप्लस हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर अफसरों ने सूची तैयार की है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। सभी 75 जिलों में प्राथमिक स्तर पर तकरीबन 19 हजार और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में लगभग 11 हजार शिक्षक सरप्लस चिह्नित किए गए हैं। इसी सूची के आधार पर जिले के अंदर शिक्षकों का समायोजन होना है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी सरप्लस सूची पर शिक्षक अधिवक्ता के माध्यम से 17 जुलाई तक हाईकोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। जिले के अंदर समायोजन का आदेश 14 नवंबर को जारी हुआ था और सरप्लस शिक्षकों की सूची दिसंबर में जारी हुई थी। इसी सूची के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी थी। एकलपीठ ने डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला समिति को प्रत्यावेदन निस्तारण के आदेश दिए थे। उसके बाद मामला डबल बेंच में चला गया। अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में 20 जुलाई को सुनवाई होनी है।
परिषदीय स्कूलों की बालिकाओं को भी दी जाएगी आत्मरक्षा की ट्रेनिंग
उधर, बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों को लेकर एक और खबर है। तय हुआ है कि परिषदीय स्कूलों की छात्राओं को भी रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिलाया जाएगा ताकि कस्तूरबा की बालिकाओं की भांति वह भी आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सकें। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए कार्ययोयजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश के 45721 उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों की छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हर विद्यालय में सेल्फ डिफेंस क्लब का गठन किया जाएगा ताकि प्रशिक्षित बालिकाएं अन्य छात्राओं को भी नियमित अभ्यास करा सकें। हर विद्यालय में छात्राओं को 48 दिन का मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें आत्मरक्षा के मूल सिद्धांत, महिलाओं व बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की जानकारी, आपातकालीन हेल्पलाइन, वार्मअप, ब्लॉक, पंच, किक, स्ट्राइक, ग्रैब से बचाव, शरीर के संवेदनशील अंगों की पहचान, आत्मरक्षा किट का प्रयोग, जेंडर संवेदनशीलता जैसे विषय शामिल किए गए हैं।
प्रशिक्षण के बाद छात्राओं का मूल्यांकन होगा और उन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए हैं कि यह अभियान केवल आत्मरक्षा सिखाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बालिकाओं में साहस, आत्मविश्वास, त्वरित निर्णय क्षमता और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का कौशल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहलु बनेगा।


