
दीपोत्सव से पहले अयोध्या में बनेगा नया कीर्तिमान, 2100 अर्चक करेंगे सरयू आरती
संक्षेप: अयोध्या में दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर मां सरयू की आरती के लिए 2100 अर्चकों की टोली तैयार की गई है, जो एक साथ आरती कर नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। शुक्रवार को आयोजित पूर्वाभ्यास में अर्चकों को प्लेटफार्म पर कतारबद्ध कर तालमेल और एकरूपता बनाए रखने का प्रशिक्षण दिया गया।
दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर 2100 अर्चकों की टोली मां सरयू की आरती उतार कर रिकार्ड बनाएगी। इसके लिए शुक्रवार को विधिवत पूर्वाभ्यास किया गया। आठवें दीपोत्सव में एक साथ 11 सौ अर्चकों की आरती का रिकार्ड बनाया गया था। इस बार इस रिकार्ड के आगे नया कीर्तिमान स्थापित करने के लिए 2100 वैदिक आचार्यों, संस्कृत विद्यालय व महाविद्यालयों के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों की टोली को चिह्नित किया गया है। इन सभी 21 सौ अर्चकों की टोली में आधी आबादी का भी खासा प्रतिनिधित्व शामिल हैं। जिला प्रशासन की ओर से शुक्रवार को इस टीम के सभी सदस्यों को बुलाकर रिहर्सल की गई। सरयू तट पर इस आरती के आयोजन को सफल बनाने के अन्य संस्थाओं के साथ ही वशिष्ठ फाउंडेशन भी सहयोग दे रहा है।

फाउंडेशन की सचिव राजलक्ष्मी तिवारी ने बताया कि आरती घाट पर आरती स्थल को 11 जोन में विभाजित किया गया है। नयाघाट से लक्ष्मण घाट की ओर विस्तारित आरती स्थल के प्रत्येक जोन में 200 प्रतिभागियों को खड़े होकर आरती करने की सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या के सभी सामाजिक संगठनों से मातृशक्ति, संस्कृत के विद्यार्थी और वंचित समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। शनिवार को शाम पांच बजे होने वाले आयोजन की तैयारी को वशिष्ठ फाउंडेशन के संयोजन में अंतिम रूप दिया जा रहा है।
अर्चकों के लिए पीत वस्त्र का ड्रेस कोड किया गया निर्धारित
इसके पहले सभी सम्बन्धित सदस्यों को उनके टोली नायकों/ समन्वयकों के साथ लक्ष्मण घाट सहस्त्र धारा के निकट उद्यान में तीन बजे बुलाया गया था। इस मौके पर सभी टोली नायकों/ विद्यालयों व महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यो व प्राचार्यों को अलग-अलग टीम से सम्बन्धित आरती की सामग्रियों का वितरण किया गया। इसके उपरांत टोली नायकों के साथ प्रस्तावित आरती घाट पर बनाए गए अस्थाई प्लेटफार्म पर उन्हें कतारबद्ध करके सभी को सामग्रियां वितरित कराकर उन्हें आपसी तालमेल के साथ आरती घुमाने का प्रशिक्षण दिया गया जिससे कि मुख्य पर्व पर आरती के दौरान सभी अर्चकों के मध्य एकरुपता बनी रहे।
इस प्रशिक्षण के बाद सूर्यास्त तक विश्राम का समय दिया गया। फिर घाट पर मां सरयू आरती कराई गयी। बताया गया कि यह आरती तब तक चलती रहेगी जब तक देवी मां की स्तुति का गान चलता रहेगा। आरती की एकरुपता बनाए रखने के लिए सभी महिला/पुरुष अर्चकों को पीत वस्त्र पहनने का आग्रह किया गया है। पुरुष वर्ग व छात्रों के लिए धोती-कुर्ता का ड्रेस कोड तय है। वहीं महिलाओं व युवतियों के लिए साड़ी अथवा सलवार-सूट निर्धारित किया गया है।
मलिन बस्ती के परिवारों में मिष्ठान का वितरण करेंगे मुख्यमंत्री
दीपोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ परम्परागत रूप से अयोध्या में रात्रि प्रवास भी करेंगे। इसके उपरांत दीपावली के पर्व पर हनुमानगढ़ी में जाकर आराध्य का दर्शन करने के साथ अपनी भेंट भी समर्पित करेंगे। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास सहित प्रमुख संतों से भेंट करने के साथ दलित परिवार के घर जाकर भोजन प्रसाद ग्रहण करेंगे। पुनः वह ऋणमोचन घाट क्षेत्र की मलिन बस्ती में परिवारों के मध्य मिष्ठान का भी वितरण दीपावली की बधाई देंगे।
मुख्यमंत्री योगी के इस कार्यक्रम को लेकर एसडीएम सदर रामप्रसाद तिवारी के साथ राजस्व विभाग की पूरी टीम सम्बन्धित परिवारों को सूचीबद्ध करने में जुटी है। वहीं भोज के लिए मुख्यमंत्री जिस परिवार में जाएंगे, उसे भी चिह्नित कर लिया गया है। इसके साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर सम्बन्धित क्षेत्र को चमकाने का भी काम युद्धस्तर पर चल रहा है। यहां सम्पर्क मार्ग को गड्ढा मुक्त करने के अलावा पटरियों को गेरुआ रंग में रंगने का भी काम चल रहा है।
अतिथि गृह के अलावा रामायण विश्वविद्यालय भी रहेगा वैकल्पिक विश्राम गृह
दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ परम्परागत रूप से अयोध्या में रात्रि प्रवास करते रहे है। उनके लिए रामकथा पार्क के निकट पर्यटन विकास निगम के सरयू अतिथि गृह को आरक्षित रखा जाता रहा है। नवें दीपोत्सव के अवसर पर वैकल्पिक विश्राम गृह के रूप में रामायण विश्वविद्यालय को भी चयनित किया गया है। यहां जिला प्रशासन के निर्देश पर कुलाधिपति के आवास/ कार्यालय को सुसज्जित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हेलीकॉप्टर उतारने के लिए अस्थाई हवाई पट्टी का भी निर्माण चल रहा है। जिले अफसरों के साथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह समन्वय के साथ सम्बन्धित व्यवस्था बनाने के लिए यहीं डेरा डाले हुए हैं।





