क्रिकेट खेलते-खेलते बुझ गईं नन्ही जिंदगियां, नाली के गड्ढे में डूबने से 2 मासूमों की मौत
कुशीनगर में गुरुवार को नाली के पानी से भरे गड्ढे में डूबकर दो मासूमों की मौत हो गई। दोनों क्रिकेट खेल रहे थे। गड्ढे से गेंद निकालते समय दोनों डूब गए। इससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
यूपी के कुशीनगर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जहां खड्डा थाना क्षेत्र स्थित भुजौली गांव में गुरुवार को नाली के पानी से भरे गड्ढे में डूबकर दो मासूमों की मौत हो गई। दोनों क्रिकेट खेल रहे थे। गड्ढे से गेंद निकालते समय दोनों डूब गए। इससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई।
भुजौली गांव के पूरब टोला निवासी रामायण का 4 साल का बेटा आर्यन गुरुवार को पड़ोसी दीपलाल के 3 साल के बेटे मयंक उर्फ ईशान के साथ रामरूप सिंह के घर के समीप क्रिकेट खेल रहा था। उनकी गेंद नाली का पानी इकट्ठा करने के लिए खोदे गए गड्ढे में चली गई। गड्ढा पानी से भरा था। दोनों बच्चे गेंद निकालने के प्रयास में गड्ढे में गिरकर डूब गए। कुछ देर बाद दोनों बच्चों के परिजन वहां पहुंचे। उन्होंने बच्चों को नहीं देखा तो उन्हें चिंताई हुई। वे बच्चों की तलाश करने लगे। एक व्यक्ति गड्ढे के पास गया तो देखा की बच्चे गड्ढे में पड़े हैं। ग्रामीण दोनों को तत्काल तुर्कहा सीएचसी ले गए जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
दोनों बच्चों के पिता मजूदरी कर परिवार का करते थे पालन-पोषण
हैंडपंप का पानी बहाने के लिए नाबदान होता है मगर इस गांव में जहां हादसा हुआ है, वहां इसकी व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में यहां लोगों ने नाबादान का पानी स्टोर करने को गहरा गड्ढा खोद रखा है। आम तौर पर ऐसी जगह सोख्ता बनाया जाता है। ग्राम पंचायतों की ओर से हर गांव में इसकी व्यवस्था है मगर यहां ऐसा आज तक नहीं हुआ था। मजबूरी में परिवार ने खुद गड्ढा गहरा खोदवा रखा था ताकि वहां गंदा का पानी स्टोर हो सके। घर के पास बने इसी गहरे गड्ढे ने दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया और दो परिवारों से हमेशा के लिए खुशियां छीन लीं।
दोनों अपने-अपने घर के इकलौते बेटे थे
आर्यन और मयंक उर्फ ईशान, दोनों ही अपने-अपने घरों के इकलौते बेटे थे। दोनों के पिता मजदूरी कर परिवार पालते थे। एक पल की लापरवाही ने ऐसा कहर बरपाया कि अब उन घरों में सिर्फ़ सन्नाटा और चीखें बची हैं। आर्यन, सपना, शालू और आरुषि का इकलौता भाई था। पिता रामायण सिंह और मां गीता के लिए वह केवल बेटा नहीं, बल्कि पूरे जीवन की उम्मीद था। आज वही मां गीता अपने कलेजे के टुकड़े को खोकर बेसुध है। आंखों से आंसू सूख चुके हैं, लेकिन दिल का दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा। घर की दीवारें आर्यन की हंसी खोज रही हैं, तीनों बहनों की निगाहें अपने भाई की राह ताकते-ताकते पत्थर हो गई हैं।
उधर, मयंक भी दीपलाल सिंह का इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन महक है। मयंक की मां पुनीता का हाल और भी दहला देने वाला है। जिस बेटे को गोद में खिलाकर बड़ा किया, आज उसी को कंधा देने की नौबत आ गई। मां की चीखें हर सुनने वाले का कलेजा चीर रही हैं। बहन महक बार-बार यही पूछ रही है-भैया कब आएंगे?

लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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