केक खाते ही 18 साल के लड़के की मौत; मासूम की बिगड़ी हालत, फूड प्वाइजनिंग की आशंका
बस्ती के महुआडाबर गांव में 5 रुपये का केक खाने से 18 वर्षीय अमन की मौत हो गई, जबकि 3 साल का बच्चा गंभीर है। पुलिस ने विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत की असली वजह स्पष्ट होगी

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पैकेट बंद खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौर थाना क्षेत्र के महुआडाबर गांव में पांच रुपये का केक खाने से 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसी केक का हिस्सा खाने वाला तीन वर्षीय मासूम अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। जानकारी के अनुसार, महुआडाबर गांव निवासी संतोष कुमार सिंह का बेटा अमन सिंह (18) रविवार को गांव की एक दुकान से पांच रुपये का पैकेट बंद केक खरीदकर लाया था।
5 रुपए वाला केक खाने से लड़के की मौत
वह केक खा ही रहा था कि गांव का तीन वर्षीय ओंकार प्रजापति वहां पहुंच गया। अमन ने केक का कुछ हिस्सा मासूम को भी दे दिया। केक खाने के कुछ ही देर बाद दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें तेज उल्टी और दस्त शुरू हो गए। परिजन घबराकर दोनों को तत्काल बभनान के एक अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अमन की हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ओंकार की हालत गंभीर देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया, जहां उसका उपचार जारी है। डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी कर रही है।
केक और सप्लाई चेन की जांच की जा रही
घटना की सूचना मिलते ही गौर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। अमन के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार गौड़ ने बताया कि मृतक के पिता की तहरीर पर केक विक्रेता बंटी गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही दुकान और सप्लाई चेन की भी जांच की जा रही है कि केक कहां से आया और उसकी एक्सपायरी या गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी तो नहीं थी। क्या केक की वजह से फूड प्वाइजनिंग हुई।
घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
डीएसपी स्वर्णिमा सिंह ने बताया कि प्राथमिक तौर पर युवक की मौत का कारण केक खाने के बाद तबीयत बिगड़ना माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। इस घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में बिकने वाले सस्ते और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों की सघन जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटना दोबारा न हो।



