यूपी में बड़ी कार्रवाई: इस जिले में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे 18 शिक्षक बर्खास्त, रिकवरी भी होगी

Feb 20, 2026 07:53 pm ISTDinesh Rathour अम्बेडकरनगर
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अंबेडकरनगर के परिषदीय स्कूलों में फर्जी नियुक्ति का फिर खुलासा हुआ है। बीएड व बीए की फर्जी डिग्री, सीटीईटी की फर्जी अंकपत्र के आधार पर शिक्षक नियुक्त 18 के अभिलेख जांच में फर्जी मिले हैं। जिन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।

यूपी में बड़ी कार्रवाई: इस जिले में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे 18 शिक्षक बर्खास्त, रिकवरी भी होगी

यूपी के अंबेडकरनगर के परिषदीय स्कूलों में फर्जी नियुक्ति का फिर खुलासा हुआ है। बीएड व बीए की फर्जी डिग्री, सीटीईटी की फर्जी अंकपत्र के आधार पर शिक्षक नियुक्त 18 के अभिलेख जांच में फर्जी मिले हैं। फर्जी 18 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। रिकवरी की कार्रवाई शुरू हो गई है।अवैध तरीके से नियुक्त 18 शिक्षकों में एक राम प्रसाद की नियुक्ति दीपक के नाम पर हुई है। वहीं 14 की नियुक्ति फर्जी डिग्री पर हुई है। चार की जाति प्रमाण पत्र अवैध तो प्रबंधक की ओर से कूट रचित अभिलेख के आधार पर शिक्षक नियुक्त किया गया है।

अभिलेखों के सत्यापन में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। बर्खास्त कर 18 में से 10 को वेतन के तौर पर ली गई धनराशि की वसूली का नोटिस जारी हुआ है। वहीं आठ फर्जी शिक्षक को वेतन भुगतान ही नहीं किया गया है। फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर राम तिलक, मंतूराम, सुरेश कुमार, सुशील कुमार चौधरी, अरुण कुमार, हरि प्रसाद, अवधेश कुमार, दुर्गा प्रसाद, विनोद कुमार पुत्र राम किरात, विनोद कुमार पुत्र द्वारिका प्रसाद और जय प्रकाश की, फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर राम रुद्र की, नियम विरुद्ध प्रबंधक से सुमन त्रिपाठी, नूरजहां, सरिता सिंह की, सीटीईटी के फर्जी अंक पत्र पर कृष्ण कुमार द्विवेदी की, अन्य के अभिलेख तथा नाम पर दीपक कुमार की नियुक्ति है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार पटेल ने बताया कि फर्जी मिले सभी 18 शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। साथ ही वेतन राशि की वसूली का आदेश दिया गया है। बताया कि अभी जांच चल रही है। अगर फर्जी शिक्षक पाए जाते हैं तो कार्रवाई होगी।

कानपुर में चल रहा था फर्जी डिग्री बनाने का खेल

यूपी के कानपुर में फर्जी डिग्री बनाने का बड़ा गिरोह का खुलासा हुआ है। कमिश्नरेट पुलिस ने बताया कि गिरोह के एमएससी पास मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा समेत चार लोगों को किदवईनगर थाना क्षेत्र के साकेतनगर से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। डिग्री माफिया का नेटवर्क देश के नौ राज्यों में फैला है। इनके पास से 14 विश्वविद्यालयों की 900 से ज्यादा डिग्रियां, पोस्ट डेटेड चेक, दो कारें, सीएसजेएमयू की माइग्रेशन बुकलेट और डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली मुहर मिली है।

पुलिस को जानकारी मिली है कि इस गैंग से फर्जी कानून की डिग्री लेकर 10 वकील कचहरी में वकालत कर रहे हैं। किदवईनगर थाना पुलिस के हत्थे चढ़ा यह डिग्री माफिया गैंग बिना परीक्षा पास कराए हाईस्कूल से लेकर बीटेक, एलएलबी, डी-फार्मा और बी-फार्मा समेत तमाम शैक्षणिक और प्रोफेशनल डिग्रियां 50 हजार से ढाई लाख रुपये में मुहैया कराता था। इस गैंग का नेटवर्क देश के तमाम राज्यों दिल्ली, मणिपुर, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड, झारखंड, मध्यप्रदेश, सिक्किम, छत्तीसगढ़ में फैला है।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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