
भाजपा की परिर्तन यात्रा के लिए बंगाल पहुंचे उत्तराखंड सीएम पुष्कर धामी ने ममता सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता राजनीतिक बदलाव के लिए तैयार है। घुसपैठियों के वोट बैंक और भय के शासन का अब अंत होगा।

सूत्र ने कहा कि हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद, कबीर ने एप्लीकेशन फाइल की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें Y-प्लस कैटेगरी की सिक्योरिटी देने का फैसला किया।

तमिलनाडु में 10 मई तक नई सरकार गठित हो जानी चाहिए। ऐसी ही डेडलाइन असम के लिए भी है, जहां 20 मई तक का वक्त है और पुदुचेरी में 15 जून तक की डेडलाइन है। इस लिहाज से चुनाव आयोग के लिए सभी 5 राज्य अहम हैं, लेकिन बंगाल में SIR के चलते थोड़ा वक्त लेना पड़ रहा है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने और चौकियों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को लगभग 105 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने के सैद्धांतिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जिसमें 17 किलोमीटर लंबे हिस्से पर कंटीले तार की बाड़ लगाने और बीएसएफ की नौ सीमा चौकियों की स्थापना के लिए यह जमीन सौंपी जाएगी।

बंगाल के सैंथिया रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर संदिग्ध बम मिलने से हड़कंप मच गया है। एहतियातन ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई है। वहीं, बंगाल और झारखंड की 3 अदालतों को भी ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए वाम मोर्चा- इंडियन सेक्यूलर फ्रंट गठबंधन लगभग तय होने के बावजूद बुधवार को जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर की ओर से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट के सामने एक नई पेशकश रखने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में नागरिकों के नाम हटाए जाने के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का बुधवार को संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि तार्किक विसंगतियों का हवाला देकर 1.2 करोड़ से अधिक नाम हटाने की साजिश रची जा रही है।

ममता बनर्जी के बयान का हवाला देते हुए अधीर रंजन ने कहाकि शायद उन्हें लग रहा है गैर-बंगाली लोग अगले चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं देंगे। इसीलिए वह प्रवासी बांग्लादेशी मजदूरों पर हमले का मुद्दा भुनाना चाहती हैं।

SIR से जुड़े मामलों को तेजी के साथ खत्म करने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक असाधारण फैसला लेते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय के जजों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि 21 फरवरी से लेकर 9 मार्च तक कोई भी जज छुट्टी पर नहीं जाएगा।

मतदाता सूची में सुधार की यह प्रक्रिया पिछले कुछ समय से जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, जब शुरुआती ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किया गया था, तभी लगभग 58 लाख नामों को सूची से बाहर कर दिया गया था।