
भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सीधे तौर पर किसी दबाव में झुकने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहता, भले ही हालिया हफ्तों में रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई हो।

रूस और अमेरिका के बीच आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि 'न्यू स्टार्ट' खत्म हो गई है। रूस ने अब सीमाओं को मानने से इनकार कर दिया है, जिससे वैश्विक परमाणु हथियारों की दौड़ फिर से शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।

Zelensky open challenge to Putin: यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने रूसी समकक्ष पुतिन को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह बातचीत के लिए कीव आ जाएं। जेलेंस्की की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रूस ने बातचीत के लिए उन्हें मॉस्को बुलाया था।

रूस और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करवाने के लिए आबूधाबी में इन दोनों देशों और अमेरिका के प्रतिनिधि बातचीत की मेज पर हैं। इससे पहले रूस ने शनिवार को यूक्रेन के दो बड़े शहरों पर एक तेज मिसाइल हमला किया। यूक्रेन के विदेश मंत्री ने इस हमले लिए राष्ट्र्पति पुतिन को जिम्मेदार ठहराया।

रूस का अनुमान है कि पश्चिमी देशों ने कुल मिलाकर उसके लगभग 300 अरब डॉलर के संप्रभु फंड फ्रीज कर रखे हैं। इनमें से अधिकतर संपत्तियां यूरोप में, बेल्जियम स्थित डिपॉजिटरी Euroclear में हैं।

पुतिन के इस बयान को जानकार अमेरिका को एक चेतावनी के तौर पर भी देख रहे हैं। गौरतलब है कि 1867 में रूसी शासन ने अलास्का को 7.2 मिलियन डॉलर में अमेरिका को बेच दिया था।

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के बीच की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है। यूरोपीय नेताओं ने वैश्विक मंचों पर डोनाल्ड ट्रंप की नीति की आलोचना की है और ग्रीनलैंड की संप्रभुता के समर्थन में बयान दिए हैं।

इस प्रस्ताव पर गुरुवार को मास्को में उच्च स्तरीय चर्चा होने की योजना है। पुतिन इस प्रस्ताव पर डोनाल्ड ट्रंप के दूतों- स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ अपनी बैठक के दौरान विस्तार से बात करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को हथियाने के प्लान पर यूरोप में लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं। यूरोपीय देशों ने सांकेतिक तौर पर ही सही लेकिन अपनी सेना की तैनाती वहां पर कर दी है। फ्रांस इस मामले में एक कदम आगे हैं, उसने बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को वहां पर भेजा है।

गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए अमेरिका ने रूस को भी न्योता दिया है। बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता नहीं हो पा रही है। ऐसे में रूस को इस बोर्ड में शामिल होने के लिए बुलाने के कई मायने हैं।