
इस वीक चंपक द्वादशी, निर्जला एकादशी और गंगा स्नान है। इसके अलावा शनि प्रदोष व्रत भी हैं। पंचांग के हिसाब से आप यहां इन व्रतों की तिथियां जान सकते हैं।

Vat Saptami 2026: कल यानी 21 जून को वट सप्तमी का व्रत रखा जाएगा। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत की विधि, वट वृक्ष की पूजा का महत्व के बारे में।

कई लोगों के ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर वट सावित्री व्रत करते हैं, लेकिन कई लोगों के ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इन दो तिथियों पर व्रत रखा जाता है, जो अधिकमास के कारण लेट हो गया है, अब कब रखा जाएगा व्रत

Vat Purnima 2026: ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास लगने के कारण महिलाओं में काफी कन्फ्यूजन है कि वट पूर्णिमा व्रत कब रखा जाएगा? आइए जानते हैं इस पर्व की सही तिथि और पूजा विधि के बारे में विस्तार से।
Vat Savitri Puja: वट सावित्री की पूजा में रेडी होना है लेकिन चेहरा फीका-फीका दिख रहा तो बस अपने फेस वॉश में इन चीजों को मिलाकर लगा लें। चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो दिखने लगेगा और आपका चेहरा बगैर मेकअप के भी ग्लो करेगा।
Vat Savitri Vrat Daan Shani Jayanti 2026 Amavasya: धार्मिक दृष्टिकोण से आज किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। अगर आप भी आज के शुभ संयोग में दान करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं किन चीजों का दान करना उत्तम है।
Vat Savitri 2026 Wishes: वट सावित्री व्रत के शुभ अवसर पर अपने परिवार, दोस्तों और करीबियों को सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य से भरी खूबसूरत शुभकामनाएं भेजें। यहां पढ़ें वट सावित्री 2026 के लिए दिल छू लेने वाले ऐसे विशेज जो इस व्रत को और भी खास बना देंगे।
वैसे तो प्रतिमाह की अमावस्या तिथि को पूजन दान आदि और पितरों के निमित्त समर्पित किया गया है लेकिन वर्षभर में होने वाली बारह अमावस्या में से ज्येष्ठ मास की अमावस्या विशेष रूप में मनाई जाने वाली होती है।
Vat Savitri 2026 Mantra: वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। यहां पढ़ें कि परिक्रमा करते समय कौन से 3 मंत्र पढ़ना शुभ माना जाता है?
इस साल वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता सावित्री ने इसी दिन अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लिए थे। तभी से महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।