
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में बीजेपी ने सभी 7 निकायों में अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। भरतपुर नगर निगम में बीजेपी का मेयर बना, जबकि जिले की छह नगरपालिकाओं में भी बीजेपी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

जयपुर का कुल आंकड़ा बीजेपी के पक्ष में जरूर है, लेकिन विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से नतीजे बताते हैं कि सिर्फ विधायक की लोकप्रियता या पार्टी की सत्ता हर वार्ड में जीत की गारंटी नहीं है। कई जगह स्थानीय उम्मीदवारों का प्रभाव चला तो कहीं संगठन की ताकत भारी पड़ी।

इन चुनावों का सबसे अलग नतीजा बारां से सामने आया। बारां नगर परिषद के 60 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। भाजपा को 9 और कांग्रेस को 17 वार्ड मिले।

झालावाड़ और झालरापाटन को दशकों से वसुंधरा राजे और उनके परिवार का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस की 29 सीटों पर जीत को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पहले चरण में प्रदेश के 162 नगरीय निकायों में मतदान हो रहा है। इनमें 4 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 134 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इस चरण का चुनाव इसलिए भी अहम है
राजस्थान के टोंक शहर में आज राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। भजनलाल शर्मा और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं।
डिजिटल दौर में तकनीक जितनी ताकतवर हो रही है, उतना ही उसका दुरुपयोग भी सामने आ रहा है। राजस्थान की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से एक फर्जी लेटर और AI से तैयार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गरमा गई है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता Vasundhara Raje ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश की महिलाओं को लंबे समय से इस बिल के लागू होने का इंतजार था,
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने हालिया बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उसे संदर्भ से हटाकर पेश किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनकी बात को तोड़-मरोड़ कर राजनीतिक अर्थ निकालने की कोशिश की। उनका बयान चार लेन राजमार्ग परियोजना से संबंधित था, न कि किसी राजनीतिक पद से।
राजस्थान की राजनीति में अक्सर आमने-सामने नजर आने वाले दिग्गज नेता अब एक ही टेबल पर बैठकर नियम तय करते दिखेंगे। जी हां, अशोक गहलोत, सचिन पायलट और वसुंधरा राजे को एक ही टीम में शामिल कर दिया गया है—और यह टीम कोई साधारण नहीं