
वोटर लिस्ट विशेष पुनरीक्षण अभियान में नोटिस पाने वाले एक करोड़ से ज्यादा लोगों को राहत मुख्य निर्वाचन अधियारी (CEO) ने राहत दी है। सीईओ ने अभियान की समीक्षा के बाद अफसरों को हेल्पडेस्क बनाने का निर्देश दिया है। ताकि अपनी परेशानियों को यहां से दूर कर सकें।

यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गलत ढंग से नाम कटवाने की राजनीतिक दलों की शिकायत पर चुनाव आयोग सख्त हो गया है। उसने नियमों का हवाला देकर स्थिति स्पष्ट की है कि किसी का नाम कटवाने के लिए एक व्यक्ति सिर्फ अपनी ओर से भरा गया फॉर्म-7 ही जमा कर सकता है।

मैनपुरी सदर तहसील के सभागार में एसआईआर के नोटिसों की सुनवाई कर रहे चकबंदी अधिकारी को दिल का दौरा पड़ गया। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां से उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

कानपुर में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने भाजपा नेताओं पर फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सपा समर्थक व पीडीए वोटरों के नाम कटवाने की साजिश हो रही है। उन्होंने वीडियो जारी कर जांच व कार्रवाई की मांग की है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों का समय एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब छह मार्च तक दावे और आपत्तियों की जा सकेंगी। वहीं नोटिस पर सुनवाई 27 मार्च तक की जाएगी।

मतदाता विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) और वोटर लिस्ट की ड्राफ्ट सूची को लेकर ममता बनर्जी की तरह सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी आक्रामक मूड में जंग लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को इसे लेकर एक्टिव कर दिया गया है।

यूपी में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर को लेकर रार बढ़ती जा रही है। एक तरफ समाजवादी पार्टी खास वर्ग के नामों को फार्म-7 के जरिए काटने का आरोप लगा रही है तो दूसरी तरफ भाजपा भी आक्रामक हो गई है।

यूपी में 6 मार्च को नहीं फाइनल वोटर लिस्ट नहीं आएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में दावे-आपत्तियां व नोटिस पर सुनवाई का समय बढ़ाया जाएगा। शुक्रवार को दावे व आपत्तियां दाखिल करने का अंतिम समय है। वहीं नोटिस पर सुनवाई 27 फरवरी तक होनी है।

पूर्व मंत्री स्व. पंडित सिंह के भतीजे और गोंडा सदर विधानसभा सीट से पूर्व सपा प्रत्याशी सूरज सिंह और उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रद्धा सिंह को नोटिस देकर पुनः एसआईआर कराने के लिए कहा गया है।

मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण में जो लोग वर्ष 2003 का ब्योरा दे चुके हैं और उनके आलेख्य प्रकाशन में छह प्रकार की विसंगतियां आने के कारण उन्हें नोटिस दिया गया है, उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई में जाने की जरूरत नहीं होगी। केवल बीएलओ को दस्तावेज देकर ही उनका काम पूरा हो जाएगा।