
यूपी पंचायत चुनाव से पहले गांवों के लिए भरपूर घोषणाएं की गई हैं। बुधवार को पेश किए गए बजट में कुल 32090 करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में खर्च करने को दिए हैं।

यूपी में विधानसभा से पहले पंचायत चुनाव के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM जुट गई है। गांव-गांव में इसे लेकर अभियान शुरू हो गया है। हर गांव में 121 सदस्यीय समिति बनाई जा रही है।

प्रधानों की टेंशन बढ़ गई है। इन दो वजहों से चुनाव समय से होगा या इसकी तारीख आगे बढ़ेगी इसको लेकर संशय बना हुआ है, जिससे प्रधान और संभावित उम्मीदवार खुलकर खर्च नहीं कर रहे हैं। 2021 के पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना मार्च में जारी हो गई थी। मई में चुनाव पूरा हो गया था।

यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर नगीना सांसद चंद्रशेखर ने पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर को पत्र लिखा है। । उन्होंने ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दे पर की जा रही देरी को लेकर सवाल उठाया है।

बसपा सुप्रीम मायावती ने सात फरवरी को सीनियर पदाधिकारियों की बड़ी बैठक बुलाई है। पार्टी एसआईआर व पंचायत चुनाव को लेकर अपनी रणनीति तय करेगी। मायावती ने घूसखोर पंडत वेब सीरीज की निंदा करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल बैन की मांग की है।

पंचायती राज विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग प्रधानों, ग्राम पंचायत सदस्यों, ब्लाक पंचायत व जिला पंचायत सदस्यों के पदों का वार्डवार परिसीमन करने के बाद उनकी पोर्टल पर फीडिंग की गई है।

यूपी पंचायत चुनाव की तारीख और आरक्षण की स्थिति अभी तय नहीं हुई है, लेकिन गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होने लगी है। वर्तमान ग्राम प्रधानों और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं।

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए एक बड़ी योजना का खाका खींचा है। 'मिशन विलेज' के तहत अब प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि दुनिया का ब्रांड बनेंगी।

यूपी पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसे लेकर यूपी के पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि निर्वाचन आयोग और सरकार अपना-अपना काम कर रही है। फिलहाल चुनाव टलने की संभावना नहीं दिख रही है।

यूपी के सुलतानपुर में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच वोटर लिस्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निर्वाचन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसडीएम ने इसे जघन्य अपराध बताया है।