
एमएलसी ने कुलाधिपति, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को लिखा पत्र अतिथि शिक्षक संघ भी कर

हजारीबाग में सवर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियम वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। धरने में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।

अम्बेडकरनगर में ब्राह्मण फाउंडेशन द्वारा यूजीसी काला कानून के विरोध में धरना आयोजित किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष धीरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ समाज में नफरत फैलाने के लिए लागू किया जा रहा है। धरना कलेक्ट्रेट के निकट मंगलवार को सुबह दस बजे से होगा।

(पेज पांच) र से पूजा अर्चना एवं प्रसाद वितरण उपरांत निकली जुलूस का समापन कुंअर सिंह चौक पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण व सभा के
सवर्ण समाज ने रविवार को यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ बाइक रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि जब तक नियम वापस नहीं लिए जाते, आंदोलन जारी रहेगा। रैली आर्यनगर चौक से शुरू होकर विभिन्न चौकों से होती हुई निकली। वक्ताओं ने 'काला' कानून वापस लेने की मांग की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई है।
एनओयू को स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम के संचालन के लिए 11 विषयों में नामांकन की मान्यता मिली है। विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इन विषयों में विद्यार्थियों का नामांकन लेने की तैयारी शुरू कर दी है।
नालंदा खुला विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर शिक्षा का दायरा बढ़ गया है। यूजीसी ने सत्र 2026 के लिए छह नए विषयों में नामांकन की मंजूरी दी है। पहले से ही यहां पांच विषयों में स्नातक की मान्यता थी। अब राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, गणित, भौतिकी एवं भूगोल में भी दाखिले की अनुमति मिली है।
बिरौल में परशुराम सेवा संस्थान और राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा द्वारा एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के लोगों ने यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचना की। वक्ताओं ने समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
अधिवक्ताओं ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संशोधित गजट के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने उपजिलाधिकारी प्रीति सिंह को ज्ञापन देकर इसे सामान्य जाति के युवाओं के हितों पर कुठाराघात बताया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे सामान्य जाति के युवाओं का भविष्य संकट में है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक अधिवक्ता महासंघ ने यूजीसी के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने जातिगत भेदभाव को खत्म करने की मांग करते हुए जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के लिए चार सूत्रीय मांगों का पत्रक सौंपा। महासंघ के अध्यक्ष ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रोफेसरों की नियुक्ति और आरक्षण को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।