
ईरान युद्ध में साथ ने देने वाले नाटो देशों को अमेरिका सजा देने की तैयारी कर रहा है। इस लिस्ट में सबसे पहला नाम स्पेन का है, जिसने अमेरिका के ईरान अभियान का खुलकर विरोध किया था। इसके अलावा दूसरे नंबर पर ब्रिटेन है, जिसने फॉकलैंड द्वीप को लेकर वाशिंगटन के रुख का विरोध किया था।

डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के खुल जाने के बाद नाटो देशों के ऊपर एक बार फिर से निशाना साधा है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज का मुद्दा हल हो जाने के बाद नाटो देशों का मदद करने के लिए फोन आया है। मैंने उनसे दूर रहने के लिए कह दिया है।

फिनलैंड ने संकेत दिया है कि वह अपने यहां परमाणु हथियारों की मेजबानी पर लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रहा है। यह बदलाव NATO की सामूहिक परमाणु रणनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बयान की आलोचना करते हुए ससेक्स के ड्यूक प्रिंस हैरी ने कहा कि उस युद्ध में शहीद हुए लोगों के बारे में सच्चाई और सम्मान से बात की जानी चाहिए। इस युद्ध में प्रिंस हैरी ने भी अपनी सेवा दी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सेना भेजनी शुरू कर दी है। फ्रांस के सैनिक पहले से ही इस द्वीप पर मौजूद हैं। इसके बावजूद राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि और फ्रांसीसी सैनिक युद्ध में भेजे जाएंगे। इसके अलावा पोलैंड ने ऐसा करने से इनकार किया है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर नाटो चीफ मार्क रुटे ने यूरोपीय देशों को भविष्य के संभावित खतरों से आगाह किया है। उन्होंने कहा कि आगामी समय में रूस का अगला लक्ष्य नाटो सदस्य देश हो सकते हैं। ऐसे में हमें तैयार रहने की जरूरत है।
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में किसी भी देश के पास वीटो की ताकत नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा अगर कोई स्थाई सदस्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करता है तो उसके मताधिकार पर अस्थाई रूप से प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के एयरपोर्ट पर ड्रोन्स देखे जाने के बाद उसे बंद कर दिया गया था, अब उसे दोबारा खोल दिया गया है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक सुरक्षा के चलते यह फैसला लिया गया है, हालांकि अभी तक ड्रोन्स की पहचान नहीं हो पाई है।
मीटिंग में एक नई चर्चा जरूर शुरू हो गई, जिसकी बात मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की ने की। यह बात थी- अमेरिका की लीडरशिप वाले नाटो की तर्ज पर इस्लामिक नाटो का गठन करना। यह आइडिया मिस्र और पाकिस्तान जैसे देशों की ओर से ही आया। मिस्र का कहना था कि इस्लामिक नाटो संगठन का मुख्यालय मिस्र में बनाया जा सकता है।
नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को वाशिंगटन संधि से हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की सामूहिक रक्षा सुनिश्चित करना है। इस समय नाटो के 32 सदस्य देश हैं।