
साल 2015 का एक मामला जब भारत के शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों के सामने पहुंचा, जो उन्होंने आपत्ति जताई। दरअसल, जज इस केस में हुई देरी पर नाराजगी जता रहे थे। उन्होंने यह तक कह दिया कि इस रफ्तार पर घोंघा सवाल उठा दे।

राजस्थान हाईकोर्ट से झटके बाद राहत के लिए शीर्ष न्यायलाय पहुंचे स्वयंभू बाबा आसाराम को झटका लगा है। अदालत ने तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला साल 2013 का है। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया था।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में दल बदल को रोकने के मुद्दे से जुड़ी याचिका दाखिल हुई थी। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने पेश की गई थी। हालांकि, इसे खारिज कर दिया गया और याचिकाकर्ता से सवाल भी पूछे गए हैं।

Deepak Kushwaha Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बिना विधायक बने दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने के खिलाफ याचिका पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे, बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।
SC ने फैमिली कोर्ट को यह भी निर्देश दिया कि वे 'पैरेंटल एलियनेशन' (माता-पिता में से किसी एक के प्रति बच्चे के मन में नफरत या दूरी पैदा करना) और 'फ़ॉल्स मेमोरी' (झूठी यादें) बनने के जोखिम जैसी चिंताओं की जाँच करें।
बिहार में 2014 के एक रिश्वत कांड में जब्त नोटों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इसे सुरक्षा में बड़ी लापरवाही बताया और कहा कि नोट नष्ट होने के इस कारण पर भरोसा नहीं किया जा सकता। फिलहाल, आरोपी महिला अधिकारी को जमानत मिल गई है।
दवे ने कोर्ट को बताया कि आखिरी बार इन समुदायों की गणना 1913 में हुई थी। इदाते आयोग (2017) और रेनके आयोग (2008) जैसी कई समितियों ने भी इनकी अलग से गिनती की सिफारिश की है।
याचिका में दावा किया गया कि सभी निजी विमानन कंपनियों ने बिना किसी ठोस वजह के ‘इकोनॉमी क्लास’ के यात्रियों के लिए मुफ्त ‘चेक-इन बैगेज’ 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया है, 'जिससे पहले जो टिकट सेवा का हिस्सा था, उसे राजस्व के एक नए स्रोत में बदल दिया गया है।'
जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने पहले महिला वकील को फटकार लगाई और एक क्लाइंट के साथ अंतरंग संबंध बनाने के लिए एक वकील के तौर पर उसके आचरण पर सवाल उठाया था। खासकर तब जब वह उसे तलाक दिलाने में मदद कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ सिर्फ इसलिए कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि उसके आदेश में कोई गलती है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के एक जिला न्यायाधीश की बर्खास्तगी रद्द कर दी।