
बेंच ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इसके अलावा अदालत ने यूपी, हरियाणा, राजस्थान को आदेश दिया है कि वे कोयला आधारित उद्योगों को लेकर सार्वजनिक नोटिस जारी करें। इस दौरान यह भी सलाह दी गई कि कोयला आधारित उद्योगों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर कर दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार और इलेक्शन कमिशन के बीच चल रहे विवाद को लेकर आपत्ति जताई। इसके साथ ही अदालत ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इसके लिए कलकत्ता हाई कोर्ट को आदेश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करे।

अपीलकर्ता सर्वेश कुमार को ब्रेन स्ट्रोक आया था। ऐसे में वह यह दावा कर दिव्यांग पेंशन की मांग कर रहे थे कि उनकी ऐसी स्थिति सैन्य सेवा के चलते हुई है। उनकी याचिका को AFT ने खारिज कर दिया था। शीर्ष न्यायालय मेडिकल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की राय पर गौर किया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्ल भुइयां की बेंच ने कहा कि यह पता लगाने की जरूरत है कि ऐसी घटनाओं के पीछे कोई एक ही पैटर्न है या फिर ऐसी घटनाओं में आपस में कोई संबंध नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह ऐसी घटनाओं का सभी राज्यों से ब्योरा जुटाए।

देश के कई राज्यों में चल रहे SIR के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी।

प्रशांत किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम ने कहा कि किसी को भी चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा नहीं लेना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर जनता आपको नकार दे तो लोकप्रियता पाने के लिए अदालत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

ममता बनर्जी ने SIR पर सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया वोटरों को शामिल करने के लिए नहीं बल्कि काटने के लिए है। ममता बनर्जी ने कहा कि इसमें आधार कार्ड को भी एक दस्तावेज के रूप में शामिल करने की परमिशन होनी चाहिए। ऐसा हुआ तो बंगाल के लोगों को बहुत खुशी होगी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का एक हिस्सा है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि निजी स्कूल ये सुविधाएं देने में विफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि जिस सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है संविधान की व्याख्या करने और न्याय सुनिश्चित करने की, वहां कमजोर वर्गों के जो मामले जाते हैं वो पेंडिंग पड़े रहते हैं या उन पे नेगेटिव ऑर्डर आते हैं।

गोंडा से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, उच्चतम न्यायालय ने समय पर हस्तक्षेप कर पूरे देश को एक बड़े संकट से बचा लिया है। उन्होने कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा यूजीसी के नए नियमों पर रोक नहीं लगाई जाती, तो यह मामला पूरे देश में एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता था।