
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में अभी OPD सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होती है। 1 अक्टूबर से इसमें बदलाव होगा। नए समय के अनुसार OPD सुबह 9 बजे शुरू होकर दोपहर 3 बजे तक चलेगी।

इस वर्ष विश्व हृदय दिवस की थीम “Don’t Miss a Beat” यानी “एक भी धड़कन न चूकें” रखी गई है। कार्यक्रम में डॉक्टरों ने इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए लोगों से अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं बरतने की अपील की।

जिस भर्ती के जरिए इन कर्मचारियों को सरकारी नौकरी मिली है, उसका पैमाना भी काफी बड़ा था। कर्मचारी चयन बोर्ड ने साल 2025 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 53,749 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की थी। इन पदों के लिए करीब 24.75 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

डिलीवरी के बाद अचानक यूरिन आउटपुट बंद होना और उसके बाद किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से इस तरह के मामलों को लेकर चिंता बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा की सोमवार दिन में घर पर अचानक तबीयत खराब हो गई। उन्हें बुखार, खांसी और सांस लेने में हल्की तकलीफ की शिकायत हुई। इसके बाद परिजन और स्टाफ उन्हें दोपहर करीब 1:30 बजे SMS अस्पताल लेकर पहुंचे।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। उन्हें तेज बुखार के साथ गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, पेट दर्द और अत्यधिक थकान जैसी शिकायतें थीं। लगातार स्वास्थ्य खराब रहने के बाद उन्हें जयपुर के SMS अस्पताल लाया गया
पंखा गिरने से रेणु के सिर में गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा। अचानक हुई इस घटना से वार्ड में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों ने घायल महिला को तत्काल उपचार दिलाने की कोशिश की, लेकिन उनका कहना है कि शुरुआती कुछ समय तक मौके पर ही इलाज नहीं मिल पाया।
24वीं मंजिल पर करीब 2 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में छत डाली जा चुकी है। हेलीपैड का डिजाइन पहले ही DGCA से अप्रूव कराया जा चुका है, जबकि थर्ड पार्टी के रूप में IIT दिल्ली ने इसका प्रूफ चेक किया है।
इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामलों के बाद अब यह नया मामला सामने आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने तीन वरिष्ठ प्रोफेसरों की जांच समिति गठित की। आदेश में समिति को तीन दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।