
वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अशोक चक्र से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। शुभांशु ने पिछले साल 26 जून को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की लॉन्चिंग होने के बाद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचकर इतिहास रच दिया था।

यूपी में विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला, अलख पांडेय और कवि हरिओम पावर समेत पांच विशिष्ट व्यक्तियों को ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान’ देगी। यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर मिलेगा।

ऐस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने बताया कि जब वह स्पेस में थे तो उन्हें भी घबराहाट हुई थी और वहां हनुमान चालीसा और राम नाम ने उनकी काफी मदद की। उन्होंने स्टूडेंट्स को काफी काम की बात भी बताई।

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बेंगलुरू में ट्रैफिक की समस्या पर अपनी बात कही। एक कार्यक्रम में कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे के सामने शुक्ला ने कहा कि बेंगलुरू के ट्रैफिक से ज्यादा आसान अंतरिक्ष की यात्रा करना था।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) में कदम रखने वाले पहले भारतीय बने थे। शुभांशु इसी साल जून में एक्सिओम मिशन-4 पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में पहुंचे और जुलाई में पृथ्वी पर लौटे थे।
शुभांशु शुक्ला हाल ही में उस ऐतिहासिक दल का हिस्सा रहे, जिसने भारत की ओर से अंतरिक्ष यात्रा की। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष से धरती को देखने का अनुभव शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
अंतरिक्ष यात्रा का मानव शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ते हैं? इस बात का जवाब दिया है भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उन्हें कई तरह की मुश्किलें झेलनी पड़ीं।
AKTU में DSC की उपाधि के बाद एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने बतौर मुख्य अतिथि अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कभी भी खुद पर विश्वास करना बंद मत करो। हम 32 दिन के लिए क्वारंटीन रहे। यह दुनिया का सबसे लंबा क्वारंटाइन था लेकिन याद रखें कि इंतजार समय का नष्ट करना नहीं, धैर्य है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एस्ट्रोनॉट्स की कड़ी ट्रेनिंग की एक झलक दिखाई है। उन्होंने नासा के मल्टी-एक्सिस ट्रेनर (मैट) स्पेस सेंटर से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में शुभांशु शुक्ला कुछ खास मशीनों के साथ दिखाई देते हैं।
750 इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले तकरीबन 5 लाख छात्र इसरो के द्वारा तैयार मॉड्यूल की पढ़ाई करेंगे। माइनर कोर्स के रूप में शामिल इस मॉड्यूल को एकेटीयू इस सत्र से लागू करने का निर्णय लिया है। इसे लेकर इसरो के साथ एक एमओयू भी किया जाएगा।