
Aaj Ka Panchang 19 September 2025, Panchang Today : हिन्दू पंचांग का उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है। पंचांग शब्द का अर्थ है , पांच अंगो वाला। पंचांग में समय गणना के पांच अंग हैं- वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। आइए जानते हैं आज के शुभ, अशुभ मुहूर्त…

श्राद्ध पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पारंपरिक श्रद्धा और भक्तिभाव से तर्पण करते हैं। पिंडदान और अन्नदान कर पितरों को तृप्त किया जाता है। ऐसा कहा कि श्राद्ध-तर्पण से पितर प्रसन्न होते हैं।

पौराणिक मान्यता है कि बदरीनाथ के पास ब्रह्मकपाल में तर्पण करने से आठ गुना अधिक पुण्य मिलता है। यहां हर साल श्राद्ध पर बड़ी संख्या में विदेशी भी पिंडदान के लिए पहुंचते हैं।

Saptami Shradh 2025: इस समय पितृपक्ष चल रहा है। पितृपक्ष में पूर्वजों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म से पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

जिस व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि को होती है उसका श्राद्ध कर्म पितृपक्ष की उसी तिथि को ही किया जाता है। यह भी विधान दिया गया है कि यदि किसी व्यक्ति को आपने पूर्वजों के देहांत की तिथि ज्ञात नहीं है तो ऐसे में इन पूर्वजों का श्राद्ध कर्म अश्विन अमावस्या को किया जा सकता है।

Pitru Paksha 2025 Prasad Recipe : श्राद्ध में बिना लहसुन प्याज वाली रेसिपी ढूंढ रहे हैं तो ये उड़द दाल रेसिपी आपके काम आने वाली है। यह रेसिपी खाने में जितनी टेस्टी है बनाने में भी उतनी ही आसान भी है। तो चलिए बिना देर किए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है श्राद्ध वाली उड़द दाल रेसिपी।

shradh Gayaji: धर्मारण्य पिंडवेदी पर त्रिपिंडी श्राद्ध का विशेष महत्व बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने यहीं पिंडदान कर मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की थी, माना जाता है कि यहां श्राद्ध से प्रेतबाधा से मुक्ति मिलती है।

जनार्दन मंदिर में आत्मश्राद्ध यानी जीते जी खुद का पिंडदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले यह मंदिर छोटा था। फिर राजा मान सिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। हर वर्ष पितृपक्ष के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

इस साल पितृपक्ष 21 सितंबर तक है। पितृपक्ष में पितृदोष शांति के उपाय करने चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि पितृदोष आपको दिखाई नहीं देता, लेकिन इससे आपके घर की तरक्की रूक जाती है। परिवार में लड़ाई झगड़े होते है और संतान आदि की समस्या रहती है, घर में कोई न कोई बीमार ही रहता हो।

बिहार के बोधगया में पिंडदान करने से मिलता है। सिर्फ इतना ही नहीं, यदि मृत व्यक्ति ने अपने जीवन काल में कोई तीर्थ यात्रा नहीं की है, तब भी इस श्राद्ध को करने से मृत व्यक्ति को गया में श्राद्ध करने के समान पुण्य मिलता है। यह व्यक्ति को पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति दिलाता है।