
Vakri Shani Lucky Zodiac Signs July 2026: जुलाई में शनि उलटी चाल शुरू करेंगे। शनि की उलटी चाल कई राशि वालों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। जानें इन लकी राशियों के बारे में जिन्हें वक्री शनि शुभ फल प्रदान करेंगे।

ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह का किसी न किसी राशि से खास संबंध माना गया है। शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। हालांकि दोनों राशियों पर शनि का असर एक जैसा नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शनि देव कुंभ राशि वालों पर थोड़ा ज्यादा मेहरबान रहते हैं।

Shani Dhaiya Singh and Dhanu Rashi: इस समय सिंह व धनु राशि पर शनि ढैय्या का प्रभाव है। ढैय्या से पीड़ित राशियों को आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जानें इन दोनों राशियों को शनि ढैय्या से कब मिलेगी मुक्ति व शनि कृपा के आसान उपाय।

कथा व्यास अनुराधा शुक्ला खुटार, संवाददाता। रौतापुर कलां के जियन बाबा स्थान पर रामकथा व शनिदेव की मूर्ति की स्थापना, प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान का
मनाया गया शनिदेव महराज की जयंती क क क कक क क क क क क क क क क क क क क कक
शनि देव जयंती पर भजनों की प्रस्तुतियों से मोहा मन मोहल्ला खातियान स्थित सुनारों वाले शिव मंदिर मैढ सभा में शनि देव जयंती का कार्यक्रम हर्ष उल्लास के स
ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है। शनि जब भी अपनी चाल या नक्षत्र बदलते हैं तो उसका असर कई राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। इस बार शनि देव ने उत्तराभाद्रपद नक्षत्र से निकलकर रेवती नक्षत्र में प्रवेश किया है।
Shani Sade Sati on Meen Rashi Till 2032: ज्योतिष में शनि को सबसे ज्यादा असर डालने वाला ग्रह माना जाता है। कहा जाता है कि शनि इंसान को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। यही वजह है कि जब भी शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है तो लोग इसे लेकर चिंता करने लगते हैं।
तारकेश्वर गुप्ता के घर पर भगवान श्री शनि देव जयंती के अवसर पर एक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूजा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजक चितरंजन गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
पालोजोरी बाजार में स्थित शनि देव मंदिर में शनिवार को जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर परिसर में ग्रामीणों की भीड़ लगी रही और विधिपूर्वक हवन किया गया। महाप्रसाद के रूप में खिचड़ी और खीर का वितरण किया गया। मंदिर की स्थापना के बाद से यह उत्सव भव्य तरीके से मनाया जा रहा है।