
दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई करते हुए सांसदों को नोटिस जारी किया था और स्पीकर के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही थी।

लोकसभा सांसद सायोनी घोष अब पश्चिम बंगाल में एकदम नई भूमिका में नजर आ सकती हैं। विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी का खुलकर विरोध करने वालीं सायोनी घोष अब भाजपा के लिए वोट मांगती नजर आ सकती हैं। हालांकि, NCPI ने नाम का ऐलान नहीं किया है।

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बीच NCPI सांसद सायोनी घोष ने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस-TMC गठजोड़ की उम्मीद जताई। जानें उन्होंने गठबंधन और नंदीग्राम विवाद पर क्या कहा।

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर गुरुवार को अंतरिम आदेश जारी किया है, जिसके बाद ममता बनर्जी या बागी गुट इसका इस्तेमाल आगामी उपचुनाव में इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसी बीच सांसद सायोनी घोष ने भी प्रतिक्रिया दी है।
ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय करने वाले बागी सांसदों के लिए भाजपा ने भी दरवाजे बंद कर दिए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि अभी नेताओं को शामिल कराने की कोई योजना नहीं है। राज्य में भाजपा पहली बार सत्ता में आई है।
यूसुफ पठान भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं होंगे। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में जाने वाले एक बागी सांसद ने ऐसा दावा किया है। वहीं, अटकलें हैं कि कुल 17 सांसद भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
बसुनिया ने कहा कि 20 सांसदों में से अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले तीन सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं हैं।
sayoni ghosh: भारतीय जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी की सहयोगी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ बंगाल में चुनाव नहीं लड़ेंगे। भाजपा का कहना है कि बंगाल में कोई भी उसका गठबंधन साथी नहीं है।
ममता बनर्जी गुट वाले तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया है कि 84 दिन से ज्यादा बीत गए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने NCPI से जुड़े मुद्दे पर RTI में मांगी गई जानकारी पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
इन 20 सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद जून महीने में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी।